“मन्नत का कफ़्फ़ारा, क़सम का कफ़्फ़ारा ही है।”

इस्लाम > Hi > हदीस > ममलत पर आधरत फकह > “मन्नत का कफ़्फ़ारा, क़सम का कफ़्फ़ारा ही है।”

हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

📖 1 मिनट पढ़ने का समय

हदीस का पाठ: “मन्नत का कफ़्फ़ारा, क़सम का कफ़्फ़ारा ही है।”

हदीस की व्याख्या: “मन्नत का कफ़्फ़ारा, क़सम का कफ़्फ़ारा ही है।”

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि अनिर्धारित नज़्र का कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित), जब उसे निर्धारित न किया गया हो और न उसका नाम लिया गया हो, क़सम का कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) है।

सीख: “मन्नत का कफ़्फ़ारा, क़सम का कफ़्फ़ारा ही है।”

श्रेणियाँ : मामलात पर आधारित फ़िक़्ह · क़समें और सन्नतें · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद