अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी किसी पत्नी का चुंबन लिया, फिर नमाज़ के लि…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी किसी प…

عن عروة، عن عائشة رضي الله عنها مرفوعاً: «أن النبي صلى الله عليه وسلم قَبَّلَ بعض نسائه، ثم خرج إلى الصلاة ولم يتوضَّأ»، قال: قلت: من هي إلا أنت؟ فَضَحِكت.

हदीस की व्याख्या: अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी किसी प…

इस हदीस में आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- बताती हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपनी किसी पत्नी का चुंबन लिया और फिर वज़ू किए बिना ही नमाज़ के लिए चल पड़े।

इस हदीस को आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- से वर्णन करने वाले वर्णनकर्ता उरवा को इस बात का अंदाज़ा हो गया कि इस हदीस में जिस पत्नी का नाम अस्पष्ट रखा गया है, वह स्वयं आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- ही हैं।

अतः, जब उन्होंने आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- को अपने इस अनुमान के बारे में बताया, तो उन्होंने उनके अनुमान की पुष्टि के रूप में हँस दिया।

"और वज़ू नहीं किया।" असल यही है कि पति के पत्नी को छूने या उसका चुंबन लेने से वज़ू नहीं टूटता। चाहे ऐसा काम-वासना के साथ किया जाए या बिना काम वासना के। क्योंकि असल, वज़ू एवं तहारत का सुरक्षित रहना है। अतः किसी भी चीज़ से वज़ू टूटने की बात कहने के लिए ऐसी दलील चाहिए, जिसके मुक़ाबले में अन्य कोई दलील न हो। अब, चूँकि स्त्री को छूने से वज़ू टूटने का कोई विश्वस्त प्रमाण नहीं है, इसलिए तहारत बाकी रहेगी। रही बात अल्लाह के फ़रमान "أو لامستم النساء" की, तो सही बात यह है कि इससे मुराद संभोग है। यही हाल इसकी एक अन्य पठन-शैली "أو لمستم النساء" का भी है। इससे मुराद भी संभोग ही है। यह बात अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- और विद्वानों के एक समूह ने कही है।

चूँकि आम तौर पर आदमी अपनी पत्नी का चुंबन काम-वासना के साथ ही लेता है, अतः यह इस बात का प्रमाण है कि काम-वासना के साथ पत्नी को स्पर्श करने से वज़ू नहीं टूटता है, हाँ, यदि इससे वीर्य-स्खलन हो जाए, तो वीर्य-स्खलन के कारण वज़ू टूट जाएगा।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · तहारत (पवित्रता प्राप्त करना) · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · वज़ू · वज़ू तोड़ देने वाली चीज़ें

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حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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