क्या मैं तुम्हें सबसे बड़े गुनाहों के बारे में न बताऊँ?

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: क्या मैं तुम्हें सबसे बड़े गुनाहों के बारे में न बताऊँ?

عن أبي بكرة رضي الله عنه قال: قال النبي صلى الله عليه وسلم: «‌أَلَا ‌أُنَبِّئُكُمْ بِأَكْبَرِ الْكَبَائِرِ؟» ثَلَاثًا، قَالُوا: بَلَى يَا رَسُولَ اللهِ، قَالَ: «الْإِشْرَاكُ بِاللهِ، وَعُقُوقُ الْوَالِدَيْنِ» وَجَلَسَ وَكَانَ مُتَّكِئًا، فَقَالَ: «أَلَا وَقَوْلُ الزُّورِ»، قَالَ: فَمَا زَالَ يُكَرِّرُهَا حَتَّى قُلْنَا: لَيْتَهُ سَكَتَ.

हदीस की व्याख्या: क्या मैं तुम्हें सबसे बड़े गुनाहों के बारे में न बताऊँ?

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने साथियों के सामने सबसे बड़े गुनाहों का वर्णन करते हुए इन तीन गुनाहों का उल्लेख किया :

1- अल्लाह का साझी ठहराना : यानी कोई भी इबादत

अल्लाह के अतिरिक्त के लिए करना और अल्लाह के अतिरिक्त को अल्लाह की तरह पूज्य तथा रब बनाना और उसे अल्लाह के नाम तथा गुण दे देना।

2- माता-पिता की अवज्ञा करना : यानी माता-पिता को अपनी बात तथा कार्य द्वारा या उनके साथ अच्छा व्यवहार न करके किसी भी प्रकार का कष्ट देना।

3- झूठ बोलना, जिसका एक रूप झूठी गवाही देना है : यानी हर वह गढ़ी हुई और झूठी बात है, जिसका उद्देश्य किसी का माल हड़पना या किसी का अपमान करना आदि हो।

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने झूठ बोलने से बार-बार सावधान यह बताने के लिए किया कि यह एक बुरी चीज़ है और समाज पर इसके बड़े बुरे प्रभाव पड़ते हैं। आपने झूठ बोलने से इतनी बार सावधान किया कि सहाबा ने आपकी परेशानी को देखकर कहा कि काश आप ख़ामोश हो जाते।

सीख: क्या मैं तुम्हें सबसे बड़े गुनाहों के बारे में न बताऊँ?

श्रेणियाँ : सद्व्यवहार पर आधारित फ़िक़्ह · दिलों को पिघलाने वाली बातें और नसीहतें · कुत्सित आचरण · गुनाहों की मज़म्मत · फ़ज़ीलतें तथा आदाब

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لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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