अगर दुनिया, अल्लाह के निकट मच्छर के पर के बराबर भी महत्व रखती, तो अल्लाह किसी काफ़िर को उस…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: अगर दुनिया, अल्लाह के निकट मच्छर के पर के बराबर भी महत्…

عن سهل بن سعد الساعدي ـرضي الله عنه- قَالَ رَسُول اللَّه -صَلّى اللهُ عَلَيْهِ وسَلَّم-: «لو كانت الدنيا تَعدل عند الله جَناح بَعوضة، ما سَقَى كافراً منها شَرْبَة ماء».

हदीस की व्याख्या: अगर दुनिया, अल्लाह के निकट मच्छर के पर के बराबर भी महत्…

इस हदीस में बयान किया गया है कि दुनिया अल्लाह के निकट एक तुच्छ एवं मूल्यहीन वस्तु है। यदि अल्लाह के निकट उसका ज़रा भी मूल्य होता, तो किसी काफ़िर को उसकी नेमतों से लाभान्वित होने का अवसर देना तो दूर, एक घूँट पानी तक न देता। जबकि इसके विपरीत आख़िरत कभी न ख़त्म होने वाली नेमतों का घर है, जो विशेष रूप से मोमिनों के लिए तैयार की गई है और उसमें काफ़िरों को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। अतः ईमान वालों को इस तथ्य से अवगत होना चाहिए और दुनिया की ओर झुकाव से बचना चाहिए, क्योंकि यह इनसान की यात्रा का एक पड़ाव है हमेशा रहने की जगह नहीं है। उन्हें दुनिया से केवल इतनी चीज़ें प्राप्त करनी चाहिए कि आख़िरत में, जो कि हमेशा रहने का घर है, उनके काम आ सकें। उच्च एवं महान अल्लाह का फ़रमान है : "तथा जो कुछ तुम दिये गये हो, वह सांसारिक जीवन का सामान तथा उसकी शोभा है और जो अल्लाह के पास है उत्तम तथा स्थायी है, तो क्या तुम समझते नहीं हो? तो क्या जिसे हमने वचन दिया है एक अच्छा वचन और वह पाने वाला हो उसे, उसके जैसा हो सकता है, जिसे हमने दे रखा है (तुच्छ) सांसारिक जीवन का सामान, फिर वह प्रलय के दिन उपस्थित किये लोगों में होगा?"

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بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
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بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
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13 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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