लज्जा ईमान का एक अंश है
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: लज्जा ईमान का एक अंश है
عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما قال: سَمِعَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلًا يَعِظُ أَخَاهُ فِي الْحَيَاءِ، فَقَالَ: «الْحَيَاءُ مِنَ الْإِيمَانِ».
हदीस की व्याख्या: लज्जा ईमान का एक अंश है
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक व्यक्ति को अपने भाई को अधिक लज्जा न करने की नसीहत करते हुए सुना, तो उसे बताया लज्जा ईमान का एक अंग है और इस से भला ही होता है।
लज्जा एक मानव व्यवहार है, जो सुंदर कार्य करने और गलत कार्य को छोड़ने की प्रेरणा देता है।
सीख: लज्जा ईमान का एक अंश है
- जो स्वभाव अच्छे काम से रोके, उसे लज्जा नहीं, अपितु शर्मीलापन, विवशता, कमज़ोरी और कायरता कहा जाएगा।
- लज्जा सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह की ओर से प्राप्त होने वाली एक चीज़ है, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करने और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहने में सहायक होती है।
- लोगों से हया करने का मतलब है, उनको सम्मान तथा उचित स्थान देना और आम तौर पर जो चीज़ें बुरी समझी जाती हैं, उनसे दूर रहना।
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