“यदि ऐसा करना ज़रूरी हो, तो रास्ते को उसका हक़ दो।" लोगों ने पूछाः उसका हक़ क्या है? आपने …

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: “यदि ऐसा करना ज़रूरी हो, तो रास्ते को उसका हक़ दो।" लोग…

عن أبي سعيد الخدري رضي الله عنه مرفوعًا: "إياكم والجلوسَ على الطُّرُقَاتِ". قالوا: يا رسول الله، ما لنا بُدٌّ من مجالسنا، نتحدث فيها. قال: "فأما إذا أَبَيْتُمْ فأعطوا الطريق حَقَّهُ". قالوا: وما حَقُّهُ؟ قال: "غَضُّ البصر، وكَفُّ الأذى، ورد السلام، والأمر بالمعروف، والنهي عن المنكر".

हदीस की व्याख्या: “यदि ऐसा करना ज़रूरी हो, तो रास्ते को उसका हक़ दो।" लोग…

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपने साथियों को रास्तों में बैठने से सावधान किया, तो उन्होंने कहा कि हमें रास्तों में बैठना ही पड़ता है। इसपर आपने कहा : यदि तुम न मानो और तुम्हें रास्तों में बैठना ही पड़े, तो रास्ते का हक़ अदा करना ज़रूरी है। सहाबा ने रास्ते के हक़ के बारे में पूछा, तो बताया कि सामने से जो स्त्रियाँ गुज़रें उन्हें ताकने की बजाय नज़र नीची रखो, गुज़रने वाली स्त्रियों को अपनी बात अथवा कर्म द्वारा कष्ट देने से बचो, जो सलाम करे उसका उत्तर दो, भलाई का आदेश दो और जब कोई गलत काम होता हुआ देखो, तो उसका खंडन करो।

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حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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