बच्चों को बोसा देना और उनसे स्नेह और दया करना।

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: बच्चों को बोसा देना और उनसे स्नेह और दया करना।

عن عائشة رضي الله عنها قالت: قَدِمَ نَاسٌ مِنَ الأَعْرَابِ عَلَى رَسُولِ اللهِ صلى الله عليه وسلم فقالوا: أَتُقَبِّلُونَ صِبْيَانَكُمْ؟ فقال: «نعم» قالوا: لَكِنَّا واللهِ ما نُقَبِّلُ! فقال رسولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم : «أَوَ أَمْلِكُ إن كانَ اللهُ نَزَعَ مِنْ قُلُوبِكُم الرَّحْمَةَ!».

हदीस की व्याख्या: बच्चों को बोसा देना और उनसे स्नेह और दया करना।

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اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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