इस्लाम > Hi > हदीस > सरत एव इतहस > नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमा के दिन फ़ज्र की नमाज़ में "الم تَنْزِيلُ السَّجْدَةَ" …
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن أبي هُرَيْرة رضي الله عنه قال: «كان النبي صلى الله عليه وسلم يَقْرأ فِي صلاة الفجر يَومَ الجُمُعَةِ: الم تَنْزِيلُ السَّجْدَةَ وهَلْ أتى على الإنسَان».
नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जुमा के दिन फ़ज्र की नमाज़ में पहली रकात में सुरा फ़ातिहा के बाद पूरी सूरा सजदा और दूसरी रकात में पूरी सूरा इनसान पढ़ा करते थे। इन दोनों सूरतों को पढ़ने का उद्देश्य इनके अंदर बयान की गई उन महत्वपूर्ण घटनाओं को याद दिलाना होता था, जो या तो इस दिन घटित हुई हैं या फिर घटित होने वाली हैं। जैसे आदम -अलैहिस्सलाम- को पैदा करना, सृष्टियों को दोबारा जीवित करके उठाना, सारे इनसानों को एकत्र करना और क़यामत के दिन के हालात आदि।
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