जब कोई बंदा मुझपर सलाम पढ़ता है, अल्लाह मुझे मेरी आत्मा लौटा देता है, ताकि मैं उसे सलाम का…
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हदीस वर्णनकर्ता: इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया है
इसकी सनद ह़सन है
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: जब कोई बंदा मुझपर सलाम पढ़ता है, अल्लाह मुझे मेरी आत्मा…
हदीस की व्याख्या: जब कोई बंदा मुझपर सलाम पढ़ता है, अल्लाह मुझे मेरी आत्मा…
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बता रहे हैं कि सलाम करने वाले को उसके सलाम का जवाब देने के लिए आपकी आत्मा को आपके शरीर में लौटा दिया जाता है। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि सलाम करने वाला दूर है कि निकट। याद रहे कि बर्ज़ख़ एवं क़ब्र के जीवन का संबंध ग़ैब की दुनिया से है, जिसकी हक़ीक़त उस अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता, जो हर चीज़ की क्षमता रखता है।
सीख: जब कोई बंदा मुझपर सलाम पढ़ता है, अल्लाह मुझे मेरी आत्मा…
- अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर अधिक से अधिक दरूद व सलाम भेजने की प्रेरणा।
- नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की अपनी कब्र में ज़िंदगी, वह सबसे श्रेष्ठ और पूर्ण ज़िंदगी है जो किसी इंसान को बरज़ख (मृत्यु के बाद की स्थिति) में मिल सकती है; और इस ज़िंदगी की असल हकीकत को अल्लाह के अलावा कोई नहीं जानता।
- इस हदीस में उन लोगों के लिए कोई दलील नहीं है, जो क़ब्र के अंदर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हमारे इस सांसारिक जीवन की तरह संपूर्ण रूप से जीवित होने का दावा करते हैं। अतः शिर्क करने वालों का इसे आपसे मदद मांगने के लिए सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना दुरुस्त नहीं है। सच्ची बात यह है कि आप इस समय बर्ज़ख़ का जीवन जी रहे हैं।
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بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
سبحان الله
अल्लाह की पवित्रता है