“अगर यह सच कह रहा है, तो कामयाब हो गया।”

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: “अगर यह सच कह रहा है, तो कामयाब हो गया।”

عَنْ طَلْحَةَ بْنِ عُبَيْدِ اللهِ رضي الله عنه قَالَ: جَاءَ رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ أَهْلِ نَجْدٍ ثَائِرُ الرَّأْسِ، نَسْمَعُ دَوِيَّ صَوْتِهِ، وَلَا نَفْقَهُ مَا يَقُولُ حَتَّى دَنَا مِنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَإِذَا هُوَ يَسْأَلُ عَنِ الْإِسْلَامِ، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «خَمْسُ صَلَوَاتٍ فِي الْيَوْمِ وَاللَّيْلَةِ» فَقَالَ: هَلْ عَلَيَّ غَيْرُهُنَّ؟ قَالَ: «لَا، إِلَّا أَنْ تَطَّوَّعَ، وَصِيَامُ شَهْرِ رَمَضَانَ»، فَقَالَ: هَلْ عَلَيَّ غَيْرُهُ؟ فَقَالَ: «لَا، إِلَّا أَنْ تَطَّوَّعَ»، وَذَكَرَ لَهُ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الزَّكَاةَ، فَقَالَ: هَلْ عَلَيَّ غَيْرُهَا؟ قَالَ: «لَا، إِلَّا أَنْ تَطَّوَّعَ»، قَالَ: فَأَدْبَرَ الرَّجُلُ، وَهُوَ يَقُولُ: وَاللهِ، لَا أَزِيدُ عَلَى هَذَا، وَلَا أَنْقُصُ مِنْهُ، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَفْلَحَ إِنْ صَدَقَ».

हदीस की व्याख्या: “अगर यह सच कह रहा है, तो कामयाब हो गया।”

नज्द का रहने वाला एक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया। उसके बाल बिखरे हुए और आवाज़ ऊँची थी। लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा था कि वह कह क्या रहा है? वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के निकट आ गया और इस्लाम के अनिवार्य कार्यों के बारे में पूछने लगा।

जवाब में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने आरंभ नमाज़ से किया और बताया कि अल्लाह ने उसपर दिन और रात में पाँच समय की नमाज़ें फ़र्ज़ की हैं।

इतना सुनने के बाद उसने पूछा कि क्या इन पाँच नमाज़ों के इतिरिक्त भी मुझपर कोई नमाज़ फ़र्ज़ है?

आपने उत्तर दिया : नहीं, परंतु तुम नफ़ल नमाज़ें जितनी चाहो, पढ़ सकते हो।

इसके बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : तुमपर रमज़ान महीने के रोज़े भी फ़र्ज़ हैं।

उसने पूछा : क्या रमज़ान महीने के रोज़े के अलावा भी कोई रोज़ा मुझपर फ़र्ज़ है?

आपने जवाब दिया : नहीं, परंतु तुम नफ़ल रोज़ा रखना चाहो, तो रख सकते हो।

फिर आपने उसके सामने ज़कात का ज़िक्र किया।

अतः उसने पूछा : क्या फ़र्ज़ ज़कात के बाद भी कोई सदक़ा ज़रूरी है?

आपने उत्तर दिया : नहीं, परंतु नफ़ली सदक़े करना चाहो, तो कर सकते हो।

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से इन अनिवार्य कार्यों को सुनने के बाद वह व्यक्ति चला गया। जाते हुए उसने अल्लाह की क़सम खाकर बताया कि वह कोई कमी-बेशी किए बिना इन अनिवार्य कार्यों का पालन करेगा। उसकी बात सुनकर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाा : यह आदमी अगर अपनी क़सम पर खरा उतरा, तो सफल हो जाएगा।

सीख: “अगर यह सच कह रहा है, तो कामयाब हो गया।”

श्रेणियाँ : अक़ीदा · अल्लाह के नाम और उनसे संबंधित अहकाम · इस्लाम

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13 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

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निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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