अल्लाह तआला ने कृपा को एक सौ भागों में बाँटकर अपने पास निन्यानवे भाग रख लिए और धरती में एक…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: अल्लाह तआला ने कृपा को एक सौ भागों में बाँटकर अपने पास…

عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «جَعَلَ اللهُ الرحمةَ مائة جُزْءٍ، فَأَمْسَكَ عِنْدَهُ تِسْعَةً وَتِسْعِينَ، وأَنْزَلَ في الأَرْضِ جُزْءًا وَاحِدًا، فَمِنْ ذَلِكَ الجُزْءِ يَتَرَاحَمُ الخَلَائِقُ، حتى تَرْفَعَ الدَّابَّةُ حَافِرَهَا عَنْ وَلَدِهَا خَشْيَةَ أَنْ تُصِيبَهُ».
وفي رواية «إِنَّ للهِ تعالى مئةُ رحمةٍ، أَنْزَلَ منها رحمةً واحدةً بَيْنَ الجِنِّ والإنسِ والبَهَائِمِ والهَوَامِّ، فَبِهَا يَتَعَاطَفُونَ، وبها يَتَرَاحَمُونَ، وبِهَا تَعْطِفُ الوَحْشُ على وَلَدِهَا، وأَخَّرَ اللهُ تعالى تِسْعًا وتِسْعِينَ رحمةً يَرْحَمُ بِهَا عِبَادَهُ يومَ القِيَامَةِ».
وعن سلمان الفارسي رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إِنَّ للهِ تعالى مئةُ رحمةٍ فمنها رحمةٌ يَتَرَاحَمُ بها الخَلْقُ بَيْنَهُمْ، وتِسْعٌ وتِسْعُونَ لِيَومِ القِيَامَةِ».
وفي رواية: «إِنَّ اللهَ تَعَالَى خَلَقَ يَوْمَ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ والأَرْضَ مئةَ رحمةٍ كُلُّ رحمةٍ طِبَاقَ مَا بَيْنَ السَّمَاءِ إلى الأَرْضِ، فَجَعَلَ منها في الأَرْضِ رَحْمَةً فبها تَعْطِفُ الوَالِدَةُ على وَلَدِهَا، والوَحْشُ والطَّيْرُ بَعْضُهَا عَلَى بَعْضٍ، فإذا كانَ يومُ القيامةِ أَكْمَلَهَا بِهَذِه الرحمةِ».

हदीस की व्याख्या: अल्लाह तआला ने कृपा को एक सौ भागों में बाँटकर अपने पास…

बरकत वाले एवं उच्च अल्लाह ने दया को एक सौ भाग में बाँटकर एक भाग दुनिया में उतारा और निन्यानवे भाग क़यामत के दिन के लिए अपने पास रख लिया। अतः दया के इसी एक भाग के कारण इनसान, जिन्नता, चोपाए एवं कीड़े-मकोड़े आदि सारी सृष्टियाँ एक-दूसरे पर दया करती हैं। यहाँ तक कि घोड़ा, जो अपने हल्केपन और दौड़-भाग के लिए जाना जाता है, अपने बच्चे को हानि पहुँचाने से बचता है और इस भय से अपने पाँव को उठाए रखता है कि कहीं बच्चा पैर के नीचे न आ जाए। इसी तरह इसी एक भाग के कारण जंगली जानवर अपने बच्चे से प्रेम करते हैं। जबकि उसके निन्यानवे भाग अल्लाह ने अपने पास रख छोड़े हैं, ताकि क़यामत के दिन अपने बंदों पर दया कर सके।

दसूरी हदीस :

उच्च एवं महान अल्लाह ने जिस दिन आकाशों एवं धरती की रचना की, उसी दिन सौ रहमतें पैदा कीं। हर रहमत इतनी बड़ी है कि आकाश एवं धरती के बीच के स्थान को भर दे। फिर एक रहमत दुनिया में रख दी, जिसके कारण माता अपनी संतान से प्यार करती है और पशु-पक्षी एक-दूसरे से प्यार करते हैं। क़यामत के दिन अल्लाह, जो सारे संसार का पालनहार है, इस एक रहमत को निन्यानवे रहमतों के साथ मिलाकर उसे संपूर्णता प्रदान कर देगा। ज़रा सोचिए कि जब केवल एक रहमत के कारण इस दुनिया में इनसान को इतनी बड़ी-बड़ी नेमतें प्राप्त हैं, तो आख़िरत में, जो कि हमेशा रहने का स्थान है, सौ रहमतें प्राप्त हो जाने के बाद कितना कुछ मिल सकता है?

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بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.6 / 29.5
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13 दिनों में अमावस्या
اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद