जो किसी समुदाय से अनुरूपता ग्रहण करे, वह उसी में से है।

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हदीस वर्णनकर्ता: इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया है

ह़सन

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: जो किसी समुदाय से अनुरूपता ग्रहण करे, वह उसी में से है।

عن ابنِ عُمَرَ رضي الله عنهما قال: قال رسولُ الله صلَّى الله عليه وسلم: «مَن تَشَبَّهَ بِقَوْمٍ فَهُوَ مِنْهُمْ».

हदीस की व्याख्या: जो किसी समुदाय से अनुरूपता ग्रहण करे, वह उसी में से है।

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जो किसी अविश्वासी, अवज्ञाकारी अथवा सत्कर्मी समुदाय की समरूपता धारण करेगा, यानी अक़ायद (आस्थाओं), इबादतों या रीति-रिवाजों से संबंधित उनकी किसी विशिष्टता को अपनाएगा, उसकी गिन्ती उसी में होगी। क्योंकि प्रत्यक्ष समरूपता आंतरिक समरूपता का कारण बनती है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि किसी समुदाय की समरूपता धारण करना उस समुदाय के मानसिक प्रभाव का नतीजा हुआ करता है और यह चीज़ उनसे प्रेम, उनके सम्मान और उनकी ओर झुकाव का कारण भी बन सकती है। चुनांचे इसके नतीजे में कभी-कभी आंतरिक और इबादत तक में उनकी समरूपता तक बात बहुँच जाती है।

सीख: जो किसी समुदाय से अनुरूपता ग्रहण करे, वह उसी में से है।

श्रेणियाँ : वर्जित समरूपता · अक़ीदा · अल-वला तथा अल-बरा (मैत्री तथा अलगाव का सिद्धांत)

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لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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