अक़ीदा पर हदीसें

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«अक़ीदा» पर 468 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

अक़ीदा पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ सूरज को किसी इनसान के लिए रोका नहीं गया है, सिवाए यूशा -अलैहिस्सलाम- के, जिनके साथ बैतुल मक़दिस की ओर चलने की रातों में ऐसा हुआ था। स़ह़ीह़ ''मेरे सहाबा को बुरा-भला मत कहो। तुममें से कोई यदि उहुद पर्वत के बराबर सोना ख़र्च कर दे, तब भी उनके एक या आधा मुद खर्च करने के बराबर नेकी प्राप्त नहीं स़ह़ीह़ कोई ऐसा व्यक्ति जहन्नम हरगिज़ नहीं जाएगा, जो बद्र एवं हुदैबिया में शामिल रहा हो। सह़ीह़ ऐ अल्लाह, अनसार को क्षमा कर दे, अनसार के पुत्रों को क्षमा कर दे तथा अनसार के पुत्रों के पुत्रों को क्षमा कर दे। स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अबू बक्र और उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से फ़रमाया : "यह दोनों नबियों और रसूलों को छोड़ तमाम अगले और पिछले अधे सह़ीह़ अल्लाह ने सत्य को उमर की ज़ुबान और दिल में रख दिया है। सह़ीह़ फ़ातिमा मेरा अंग है, जिसने उसे नाराज़ किया, उसने मुझे नाराज़ किया। स़ह़ीह़ हसन और हुसैन जन्नत के जवानों के सरदार हैं। सह़ीह़ इसे देखो, मुझसे मच्छर को मारने के बारे में पूछ रहा है, जबकि इन्हीं लोगों ने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के नवासे का वध किया है। हालाँकि ख़ुद मैंने सह़ीह़ ऐ अल्लाह, मैं इससे मुहब्बत करता हूँ, तू भी इससे मुहब्बत कर और हर उस व्यक्ति से मुहब्बत कर, जो इससे मुहब्बत करे। सह़ीह़ एक दिन नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हसन -रज़ियल्लाहु अन्हु- को लेकर बाहर आए, उन्हें साथ लेकर मिंबर के ऊपर गए और फ़रमायाः "मेरा यह बेटा सरदार है। हो सह़ीह़ जिसने हसन और हुसैन से मुहब्बत की, उसने मुझसे मुहब्बत की और जिसने उन दोनों से दुश्मनी की, उसने मुझसे दुश्मनी की। ह़सन तुम्हारे अंदर सबसे अच्छा व्यक्ति वह है, जो मेरे बाद मेरे परिवार के लिए सबसे अच्छा हो।" वह कहते हैंः अब्दुर्रहमान बिन औफ़ ने चार लाख में एक एक बाग़ बेच सह़ीह़ "ऐ आइश! यह जिबरील हैं, जो तुम्हें सलाम कहते हैं।" तो मैंने यूँ जवाब दियाः "व अलैहिस्सलाम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु। आप वह देखते हैं, जो मैं नहीं देखती। सह़ीह़ पुरुषों में से बहुत-से लोग संपूर्ण हुए, लेकिन स्त्रियों में से संपूर्ण केवल फ़िरऔन की पत्नी आसिया और मरयम बिंत इमरान हुईं। हाँ, सारी स्त्रियों में आइश सह़ीह़ मैंने जाफ़र को देखा कि जन्नत मैं फ़रिश्तों के साथ उड़ रहे हैं। सह़ीह़ जब इबराहीम -रज़ियल्लाहु अन्हु- की मृत्यु हुई, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "जन्नत में उसके लिए एक दूध पिलाने वाली निर्धारित सह़ीह़ हर उम्मत का एक 'अमीन' (जिसे अमानतदारी के कारण अन्य लोगों के मुक़ाबले में अधित ख्याति प्राप्त हो) होता है, और हमारी इस उम्मत का 'अमीन' अबू उबैदा बिन जर ह़सन उहुद युद्ध के दिन नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- दो-दो कवच पहने हुए थे। आप एक चट्टान पर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन चढ़ नहीं पा रहे थे। ऐसे में, सह़ीह़ साद -रज़ियल्लाहु अन्हु- आए, तो नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "यह मेरे मामा हैं। कोई व्यक्ति मुझे अपना मामा भी दिखाए!।" सह़ीह़ मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को नहीं देखा कि साद -के बाद किसी पर अपने माँ-बाप को न्योछावर किया हो। मैंने आपको कहते हुए सुना हैः "तुम तीर चलाओ, ह़सन मेरे बाद तुम्हारे गुज़र-बसर का मसला उन मसलों में से है, जो मुझे परेशान रखते हैं, तथा तुम्हारे गुज़र-बसर के प्रबंध का भार वही सहन कर सकेंगे, जो धैर्य व सह़ीह़ ऐ अल्लाह, इसे सीधा रास्ता बताने वाला और सीधे रास्ते पर चलने वाला बना तथा इसके ज़रिए लोगों को सीधा रास्ता दिखा। सह़ीह़ अम्मार को जब भी दो बातों में से एक को चुनने का अधिकार दिया गया, तो उन्होंने उसे चुना, जो सत्य से अधिक निकट हो। सह़ीह़ आस के दोनों बेटे; अम्र और हिशाम, मोमिन हैं। सह़ीह़ जब अल्लाह किसी बंदे को किसी स्थान में मृत्यु देना चाहता है, तो वहाँ उसकी कोई ज़रूरत रख देता है। सह़ीह़ जब अल्लाह किसी बंदे के साथ भलाई चाहता है, तो उसकी मृत्यु से पहले उस से अच्छे कार्य करवाता है। सह़ीह़ दोनों ने सच कहा है। इन लोगों को ऐसा अज़ाब दिया जाता है कि सारे चौपाए उसे सुनते हैं। सह़ीह़ मेरी ओर वह्य की गई है कि तुम्हें क़ब्रों में कमो-बेश दज्जाल की परीक्षा की भाँति परीक्षा का सामना करना पड़ेगा। सह़ीह़ इस उम्मत को क़ब्रों के अंदर आज़माया जाता है। अगर तुम दफ़न करना छोड़ न दो, तो मैं अल्लाह से दुआ करूँ कि तुम्हें भी क़ब्र की वह यातना सुनाए, जो मैं सुनत सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सूरज डूबने के बाद निकले, तो एक आवाज़ सुनी। अतः, आपने फ़रमायाः "यहूदियों को उनकी क़ब्रों में अज़ाब दिया जा रह स़ह़ीह़ तुममें से कोई जब मर जाता है, तो सुबह-शाम उसे उसका ठिकाना दिखाया जाता है। ह़सन क़ब्र की कुछ नेमतों और यातनओं का ज़िक्र सह़ीह़ नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मदीने के एक क़िले के ऊपर चढ़कर नीचे की ओर देखा और फ़रमायाः "क्या तुम वह देख रहे हो, जो मैं देख रहा हूँ?" सहाबा ने कह सह़ीह़ क़यामत से पहले छह निशानियाँ सामने आएँगी, उन्हें गिन लो। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "मुझे और क़यामत को इस तरह भेजा गया है।" यह कहते समय आपने अपनी दोनों उँगलियों को फैलाकर उनसे इशारा सह़ीह़ क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक हिजाज़ की भूमि से ऐसी आग न निकले, जिससे बुसरा में मौजूद ऊँटों की गरदनें चमक उठें। सह़ीह़ मेरी उम्मत के अंतिम ज़माने में एक ख़लीफ़ा होगा, जो गिने बिना लप भर-भरकर लोगों को माल देगा। सह़ीह़ तुम अरब उपमहाद्वीप के काफ़िरों से युद्ध करोगे और अल्लाह इस क्षेत्र में तुम्हें विजय प्रदान करेगा, फिर फ़ारस क्षेत्र के लोगों से युद्ध करोगे और इस क्षे स़ह़ीह़ यह धर्म वहाँ तक ज़रूर पहुँचेगा, जहाँ दिन और रात पहुँचती है। अल्लाह किसी नगर तथा गाँव और देहात तथा रेगिस्तान का कोई घर नहीं छोड़ेगा, जहाँ इस धर्म को दा सह़ीह़ मेरी उम्मत के दो गिरोह ऐसे हैं, जिन्हें अल्लाह ने आग से सुरक्षित कर दिया है; एक गिरोह जो हिंद की भूमि पर युद्ध करेगा और दूसरा गिरोह जो ईसा बिन मरयम -अ सह़ीह़ क़यामत उस समय तक नहीं आ सकती, जब तक तुम तुर्कों से युद्ध न कर लो, जिनकी आँखें छोटी-छोटी, चेहरे लाल और नाक छोटी तथा चिपटी होगी, तथा उनके चेहरे ऐसे मालू सह़ीह़ क़यामत उस समय तक नहीं आएगी, जब तक तुम ख़ूज़ और किरमान के ग़ैरअरब लोगों से युद्ध न कर लो, जिनके चेहरे लाल, नाक चिपटी और आँखें छोटी-छोटी होंगी। उनके चेह सह़ीह़ \उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, लोगों पर एक ऐसा समय आएगा कि क़त्ल करने वाले को पता नहीं होगा कि उसने किस बात पर क़त्ल किया और क़त्ल होने वाले को स़ह़ीह़ सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह तुम्हें इस बात से रोकता है कि तुम अपने बाप-दादाओं की क़सम खाओ स़ह़ीह़ क़यामत के दिन लोगों के बीच सबसे पहले रक्त के बारे में निर्णय किया जाएगा। स़ह़ीह़ जिसने हमपर हथियार उठाया, वह हममें से नहीं है। सह़ीह़ क्या मैं तुम्हें उन तीन व्यक्तियों के बारे में न बताऊँ? उनमें से एक ने अल्लाह की शरण ली, तो अल्लाह ने उसे अपनी शरण दे दी। दूसरा शरमाया, तो अल्लाह ने भ स़ह़ीह़ इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई कर सह़ीह़ आदमी एक नींद सोएगा और उसके दिल से अमानत उठा ली जाएगी। केवल असका धुंधला- सा निशान रह जाएगा। फिर और एक नींद लेगा, जिसके साथ उसके दिल से अमानत समाप्त कर स़ह़ीह़ मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू एक पत्थर है। न हानि पहुँचा सकता है और न लाभ दे सकता है। यदि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को तुझे चूमते न देखा हो सह़ीह़ मैं तुमसे केवल अल्लाह के लिए मोहब्बत करता हूँ। तो उसने कहाः वह भी तुमसे मोहब्बत करे, जिसके लिए तुम्हें मुझसे मोहब्बत है। सह़ीह़ मैं इसलिए नहीं रो रही हूँ कि मुझे यह मालूम नहीं कि अल्लाह के पास जो कुछ है, वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए उत्तम है, बल्कि इसलिए सह़ीह़ आप हमारे पास जितनी बार आते हैं, उससे अधिक क्यों नहीं आते? सह़ीह़ जो अल्लाह पर तथा क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, वह अतिथि का सम्मान करने के मामले में उसका हक़ अदा करे। सहाबा ने कहाः उसका हक़ क्या है, ऐ अल्लाह के रसू सह़ीह़ तो क्या तुम मुझसे अरब क़बीलों के बारे में पूछ रहे हो? उनमें से जो लोग जाहिलियत काल में श्रेष्ठ थे, वे इसलाम में भी श्रेष्ठ हैं, जब इसलाम का ज्ञान प्रा सह़ीह़ अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कंकड़ फेंकने से मना किया है (जो दो उंगलियों के बीच रख कर फेंका जाता है) और फ़रमाया हैः यह न शिकार को मारत सह़ीह़ एक दिन रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मक्का और मदीना के बीच स्थित ख़ुम्म नामी एक जल-स्रोत के पास हमारे बीच भाषण देने के लिए खड़े हुए,तो अल्लाह की प्र स़ह़ीह़ एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से क़यामत के बारे में पूछा। उसने कहा : क़यामत कब आएगी? आपने कहा : "तुमने उसके लिए क्या तैयारी की स़ह़ीह़ क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.6 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
سبحان الله अल्लाह की पवित्रता है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद