इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > उमर बिन खत्ताब- रज़ियल्लाहु अन्हु- ने लोगों से, किसी अत्याचार के नतीजे में गर्भपात के बारे…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رضي الله عنه أَنَّهُ اسْتَشَارَ النَّاسَ فِي إمْلاصِ الْمَرْأَةِ، فَقَالَ الْمُغِيرَةُ بْنُ شُعْبَةَ: «شَهِدْت النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَضَى فِيهِ بِغُرَّةٍ- عَبْدٍ أَوْ أَمَةٍ- فَقَالَ: ائتني بِمَنْ يَشْهَدُ مَعَك، فَشَهِدَ مَعَهُ مُحَمَّدُ بْنُ مَسْلَمَةَ».
किसी महिला ने उस पर हुए अत्याचार के कारण जन्म के समय से पुर्व ही अपने बच्चे को जन्म दिया जिस की पेट ही में मृत्यु हो चुकी थी । हज़रत उमर -जो एक इन्साफ तथा न्याय करने वाले खलीफ़ा थे- सहाबा तथा बुद्धिमान उलमा से समस्याओं तथा मुद्दों के बारे परामर्श किया करते थे। जब इस महिला ने मरा हुआ बच्चा जन्म दिया, तो उसकी दियत का हुक्म उन की समझ में न आया, चुनांचे उन्हों ने सहाबा से परामर्श किया, तो मुग़ीरा ने बतायाः कि उन्हों ने ऐसे ही एक मामले में रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को एक दास अथवा दासी को दासत्व मुक्त करने का निर्णय करते हुए देखा है। उमर ने इस हुक्म को अधिक सिध्द करना चाहा, इस लिए कि यह निर्णय क़यामत तक के लिए विधि -क़ानून- बनेगा, इसी लिए मुग़ीरा से कहा किः वह अपने कथन की सच्चाई तथा हदीस की सटीकता पर साक्षी ले आएं। तो मुहम्मद बिन मसलमा ने उनकी बातों की पुष्टी की।
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