''जब किसी मुसलमान को कोई दुख पहुँचता है, और वह यह दुआएँ पढ़ता है, जिनका अल्लाह ने आदेश दिय…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: ''जब किसी मुसलमान को कोई दुख पहुँचता है, और वह यह दुआएँ…

हदीस की व्याख्या: ''जब किसी मुसलमान को कोई दुख पहुँचता है, और वह यह दुआएँ…

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- कहती हैं कि उन्होंने एक दिन अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : जब किसी मुसलमान पर कोई मुसीबत आती है और वह कहता है यह वाक्य जो अल्लाह ने उसके लिए पसंद किया है : {हम अल्लाह ही के हैं और हमें उसी की ओर लौटकर जाना है।} [सूरा बक़रा : 156], ऐ अल्लाह! मुझे इस मुसीबत पर सब्र करने का प्रतिफल प्रदान कर और इसका मुझे बेहतर बदला दे, तो अल्लाह उसे बेहतर बदला प्रदान करता है। उनका कहना है कि जब उनके पति अबू सलमा की मृत्यु हो गई, तो मैंने अपने दिल में कहा कि अबू सलमा से बेहतर भला कौन-सा मुसलमान हो सकता है? उनका घर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की ओर हिजरत करने वाला पहला घर था। तब अल्लाह ने मेरी मदद की और मैं ने यह वाक्य कह दिया, तो अल्लाह ने अबू सलमा के स्थान पर मुझे अल्लाह के रसूल को दे दिया, जो निश्चित रूप से उनसे बेहतर थे।

सीख: ''जब किसी मुसलमान को कोई दुख पहुँचता है, और वह यह दुआएँ…

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الله أكبر अल्लाह सबसे महान है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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