इस्लाम > Hi > हदीस > अकद > मैं हौज़ (तालाब) के पास ही रहूँगा, ताकि देख सकूँ कि तुममें से कौन-कौन मेरे पास पानी पीने आ…
स़ह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا، قَالَتْ: قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِنِّي عَلَى الحَوْضِ حَتَّى أَنْظُرَ مَنْ يَرِدُ عَلَيَّ مِنْكُمْ، وَسَيُؤْخَذُ نَاسٌ دُونِي، فَأَقُولُ: يَا رَبِّ مِنِّي وَمِنْ أُمَّتِي، فَيُقَالُ: هَلْ شَعَرْتَ مَا عَمِلُوا بَعْدَكَ، وَاللَّهِ مَا بَرِحُوا يَرْجِعُونَ عَلَى أَعْقَابِهِمْ».
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि क़यामत के दिन आप अपने हौज़ (तालाब) के पास ही होंगे, ताकि देख सकें कि आपकी उम्मत के कौन-कौन लोग आपके हौज़ पर पानी पीने आ रहे हैं। उस दिन कुछ लोगों को आपके पास आने से रोक दिया जाएगा। यह देख आप कहेंगे कि ऐ मेरे रब! ये मेरे और मेरी उम्मत के लोग हैं। इसपर कहा जाएगा : क्या आप जानते हैं कि इन लोगों ने आपसे जुदा होने के बाद क्या किया है? अल्लाह की क़सम, ये लोग लगातार ऐड़ियों के बल पीछे लौटते रहे और अपने दीन से दूर जाते रहे। इसलिए ये न तो आपके लोग हैं और न आपकी उम्मत के लोग।
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