इस्लाम > Hi > हदीस > सरत एव इतहस > नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक सफर में थे। इशा की नमाज़ पढ़ी, तो एक रकअत में सूरा वत्-त…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن الْبَرَاء بْن عَازِبٍ رضي الله عنهما «أن النبي صلى الله عليه وسلم كان في سفر، فصلى العشاء الآخِرَةَ، فقرأ في إحدى الركعتين بِالتِّينِ وَالزَّيْتُون فما سمعت أحدًا أحسن صوتًا أو قراءة منه».
नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इशा की नमाज़ की पहली रकात में सूरा 'वत्-तीन वज़़्-ज़ैतून' पढ़ी; क्योंकि आप सफ़र में थे और सफ़र की परेशानी एवं तकान ज़्यादा लंबी क़िरात की अनुमति नहीं देती। लेकिन सफ़र में होने के बावजूद नमाज़ के अंदर अच्छी आवाज़ में क़ुरआन पढ़ने से नहीं रुके, जो कुरान सुनते समय, विनीत होने का कारण बनता है और जिस कारण दिल के न भटकने की कैफ़ियत पैदा होती है।
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