इस्लाम > Hi > हदीस > पवतर करआन तथ उसस सबधत अनय वषय > जब तुम ऐसे लोगों को देखो, जो क़ुरआन की सदृश आयतों का अनुसरण करते हों, तो जान लो कि उन्हीं …
स़ह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 2 मिनट पढ़ने का समयعَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللهُ عَنْهَا قَالَتْ: تَلَا رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَذِهِ الْآيَةَ: {هُوَ الَّذِي أَنْزَلَ عَلَيْكَ الْكِتَابَ مِنْهُ آيَاتٌ مُحْكَمَاتٌ هُنَّ أُمُّ الْكِتَابِ وَأُخَرُ مُتَشَابِهَاتٌ فَأَمَّا الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِمْ زَيْغٌ فَيَتَّبِعُونَ مَا تَشَابَهَ مِنْهُ ابْتِغَاءَ الْفِتْنَةِ وَابْتِغَاءَ تَأْوِيلِهِ، وَمَا يَعْلَمُ تَأْوِيلَهُ إِلَّا اللَّهُ، وَالرَّاسِخُونَ فِي الْعِلْمِ يَقُولُونَ آمَنَّا بِهِ كُلٌّ مِنْ عِنْدِ رَبِّنَا وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّا أُولُو الْأَلْبَابِ} [آل عمران: 7]. قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «فَإِذَا رَأَيْتِ الَّذِينَ يَتَّبِعُونَ مَا تَشَابَهَ مِنْهُ فَأُولَئِكَ الَّذِينَ سَمَّى اللهُ، فَاحْذَرُوهُمْ».
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यह आयत पढ़ी : "(ऐ नबी!) वही है जिसने आप पर यह पुस्तक उतारी, जिसमें से कुछ आयतें मुहकम हैं, वही पुस्तक का मूल हैं, तथा कुछ दूसरी आयतें मुतशाबेह हैं। फिर जिनके दिलों में टेढ़ है, तो वे फ़ितने की तलाश में तथा उसके असल आशय की तलाश के उद्देश्य से, सदृश अर्थों वाली आयतों का अनुसरण करते हैं। हालाँकि उनका वास्तविक अर्थ अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। तथा जो लोग ज्ञान में पक्के हैं, वे कहते हैं हम उसपर ईमान लाए, सब हमारे रब की और से है। और शिक्षा वही लोग ग्रहण करते हैं, जो बुद्धि वाले हैं।" इस आयत में अल्लाह पाक ने बताया है कि उसी ने अपने नबी पर क़ुरआन उतारा है, जिसकी कुछ आयतों का अर्थ बिल्कुल स्पष्ट है और यही आयतें क़ुरआन का मूल हैं तथा विभेद के समय इन्हीं की ओर लौटा जाएगा। जबकि उसकी कुछ आयतें एक से अधिक मायनों की संभावना रखती हैं, कुछ लोगों के सामने उनका अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाता या ऐसा लगता है कि उनके तथा अन्य आयतों के बीच में टकराव है। फिर अल्लाह ने बताया कि इन आयतों के बारे में लोगों का रवैया कैसा रहता है? जिन लोगों के दिल सत्य से हटे हुए हैं, वे स्पष्ट अर्थ वाली आयतों को छोड़ कर एक से अधिक अर्थ की संभावना रखने वाली आयतों को लेते हैं। इससे उनका उद्देश्य संदेह पैदा करना और लोगों को गुमराह करना होता है। वे इन आयतों का अर्थ अपनी इच्छा अनुसार निकालते हैं। इसके विपरीत गहरे ज्ञान वाले लोगों को पता होता है कि यह आयतें एक से अधिक अर्थ की संभावना वाली हैं, इसलिए वे इनकी व्याख्या स्पष्ट अर्थ वाली आयतों के आलोक में करते हैं और इस बात पर विश्वास रखते हैं कि यह सारी आयतें उच्च एवं पवित्र अल्लाह की उतारी हुई हैं, इसलिए इनमें परस्पर टकराव नहीं हो सकता। लेकिन इससे शिक्षा वही लोग प्राप्त कर सकते हैं, जो स्वच्छ विवेक रखते हैं। फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने ईमान वालों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा से कहा कि जब तुम ऐसे लोगों को देखो, जो क़ुरआन की मुतशाबेह आयतों के पीछे पड़ते हों, तो समझ जाओ कि यही वह लोग हैं, जिनका ज़िक्र अल्लाह ने इन शब्दों में किया है : "फिर जिनके दिलों में टेढ़ है।" अतः इन लोगों से सचेत रहो और इनकी बात पर ध्यान न दो।
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