अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आशूरा के दिन (मुहर्रम की दसवीं तारीख़ को) रोज…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आशूरा के द…

عن ابن عباس رضي الله عنهما أن رسول الله صلى الله عليه وسلم صام يوم عاشوراء وأمر بصيامه.

हदीस की व्याख्या: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आशूरा के द…

उलेमा इस बात पर एकमत हैं कि दसवें मुहर्रम का रोज़ा वाजिब नहीं, सुन्नत है। लेकिन इस बात पर उनके मत अलग-अलग हैं कि शुरू में जब इस दिन के रोज़े का आदेश दिया गया था और रमज़ान के रोज़े फ़र्ज़ नहीं हुए थे, उस समय उसका हुक्म क्या था? उस समय वह वाजिब था या नहीं? यदि यह सहीह है कि शुरू में वाजिब था, तो उसका वजूब कई सहीह हदीसों के कारण निरस्त हो चुका है। इस तरह की एक हदीस आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- से वर्णित है कि क़ुरैश क़बीले के लोग अज्ञान काल में दसवें मुहर्रम का रोज़ा रखा करते थे। फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उसे रखने का आदेश दिया, यहाँ तक कि रमज़ान के रोज़े फ़र्ज़ हो गए। तब अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "जो चाहे उस दिन रोज़ा रखे और जो चाहे न रखे।" इस हदीस को इमाम बुख़ारी (3/24 हदीस संख्या : 1893) और इमाम मुस्लिम (2/792 हदीस संख्या : 1125) ने रिवायत किया है।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · रोज़े · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · नफ़ल रोज़े

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.6 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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