इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़ज्र की नमाज़ के बाद सूरज निकलने तक तथा अस्र…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن عبد الله بن عباس رضي الله عنه قال: «شَهِد عِندِي رِجَال مَرْضِيُون - وأَرْضَاهُم عِندِي عُمر- أنَّ النَبِي صلى الله عليه وسلم نَهَى عن الصَّلاة بَعد الصُّبح حتَّى تَطلُعَ الشَّمسُ، وبعد العصر حتَّى تَغرُب».
وعن أبي سعيد رضي الله عنه عن رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه قال: «لا صَلاَة بعد الصُّبح حتَّى تَرتَفِعَ الشَّمسُ، ولا صَلاَة بعد العَصرِ حتَّى تَغِيبَ الشَّمس».
इन दोनों हदीसों में अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़ज्र की नमाज़ के बाद नमाज़ पढ़ने से मना किया है, यहाँ तक कि सूरज निकल आए और देखने वाले को क्षितिज रेखा से एक नेजा ऊपर दिखाई दे। इसमें कुछ मिनट लगेत हैं। उलेमा इसका समय निश्चित करने में एकमत नहीं हैं, इनके विभिन्न मतों के अनुसार इसमें पाँच से पंद्रह मिनट लगते हैं।
इसी तरह अस्र की नमाज़ के बाद सूरज डूबने अर्थात मग्रिब की अज़ान से चंद मिनट पहले नमाज़ पढ़ने से मना किया है। क्योंकि इन दोनों समयों में नमाज़ पढ़ना एक तरह से बहु-ईश्वरवादियों की समानता अपनाना है, जो सूरज निकलते और डूबते समय उसकी पूजा करते हैं। जबकि हमें उनकी समानता ग्रहण करने से मना किया है। क्योंकि जो किसी जाति की समानता ग्रहण करता है, वह उसीमें से शुमार होता है।
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