जो जिहाद किए बिना अथवा जिहाद के इरादे के बिना ही मर गया, वह मुनाफ़िक़ ही अवस्था में मरा।

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: जो जिहाद किए बिना अथवा जिहाद के इरादे के बिना ही मर गया…

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «من مات ولم يَغْزُ، ولم يُحدث نفسه بالغزو، مات على شُعْبَةٍ من نِفَاقٍ»

हदीस की व्याख्या: जो जिहाद किए बिना अथवा जिहाद के इरादे के बिना ही मर गया…

हर वह व्यक्ति जो जिहाद करने में सक्षम है और इस अवस्था में मर जाए कि उसने न तो जिहाद किया हो और न ही उसके बारे में अपने दिल में सोचा हो, अर्थात् उसने अपने दिल में जिहाद करने के बारे में बात नहीं की। इसका मतलब यह कि उसने जिहाद का संकल्प नहीं किया, तो उसके अंदर कुछ न कुछ निफ़ाक़ (पाखंड) है। जिहाद के संकल्प की एक ज़ाहिरी निशानी युद्ध के हथियार की तैयारी है। अल्लाह तआला का फ़रमान है : (ولو أرادوا الخروج لأعدوا له عدة) "यदि वे निकलना चाहते, तो अवश्य ही उसके लिए कुछ तैयारी करते।"

आपके शब्द : "مات على شُعْبَةٍ من نِفَاقٍ" (वह निफ़ाक़ की एक शाखा पर मर गया) : अर्थात् : एक प्रकार के निफ़ाक़ की अवस्था में मरा। मतलब यह कि : जो इस अवस्था में मरा, वह मुनाफ़िक़ों तथा जिहाद से पीछे रहने वालों के समान हो गया। तथा जो किसी जाति की समानता अपनाए, वह उन्हीं में से है। अतः हर मुसलमान को जिहाद की नीयत रखनी चाहिए।

जिहाद करने से अभिप्राय : जिहाद की शर्तों के साथ जिहाद करना है। यदि वे (शर्तें) पाई जाएँ, तो जिहाद किया जाएगा, अन्यथा उसकी नीयत बाक़ी रहेगी यहाँ तक कि जिहाद के कारण पाए जाएँ।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · जिहाद · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · जिहाद की फ़ज़ीलत

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الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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