इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > लोगो! मैंने ऐसा इसलिए किया, ताकि तुम मेरा अनुसरण कर सको और मेरी नमाज़ सीख सको।
स़ह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 2 मिनट पढ़ने का समयعن أَبِي حَازِمِ بْن دِينَارٍ: أَنَّ رِجَالًا أَتَوْا سَهْلَ بْنَ سَعْدٍ السَّاعِدِيَّ، وَقَدِ امْتَرَوْا فِي الْمِنْبَرِ مِمَّ عُودُهُ، فَسَأَلُوهُ عَنْ ذَلِكَ، فَقَالَ: وَاللهِ إِنِّي لَأَعْرِفُ مِمَّا هُوَ، وَلَقَدْ رَأَيْتُهُ أَوَّلَ يَوْمٍ وُضِعَ، وَأَوَّلَ يَوْمٍ جَلَسَ عَلَيْهِ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، أَرْسَلَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى فُلَانَةَ -امْرَأَةٍ من الأنصار قَدْ سَمَّاهَا سَهْلٌ-: «مُرِي غُلَامَكِ النَّجَّارَ أَنْ يَعْمَلَ لِي أَعْوَادًا أَجْلِسُ عَلَيْهِنَّ إِذَا كَلَّمْتُ النَّاسَ»، فَأَمَرَتْهُ فَعَمِلَهَا مِنْ طَرْفَاءِ الْغَابَةِ، ثُمَّ جَاءَ بِهَا، فَأَرْسَلَتْ إِلَى رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، فَأَمَرَ بِهَا فَوُضِعَتْ هَاهُنَا، ثُمَّ رَأَيْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَّى عَلَيْهَا وَكَبَّرَ وَهُوَ عَلَيْهَا، ثُمَّ رَكَعَ وَهُوَ عَلَيْهَا، ثُمَّ نَزَلَ الْقَهْقَرَى، فَسَجَدَ فِي أَصْلِ الْمِنْبَرِ ثُمَّ عَادَ، فَلَمَّا فَرَغَ أَقْبَلَ عَلَى النَّاسِ فَقَالَ: «أَيُّهَا النَّاسُ، إِنَّمَا صَنَعْتُ هَذَا لِتَأْتَمُّوا وَلِتَعَلَّمُوا صَلَاتِي».
एक व्यक्ति एक सहाबी के पास यह पूछने के लिए आया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जो मिंबर बनवाया था, वह किस लकड़ी की थी? दरअसल हुआ यह था कि उनके बीच इस संबंध में बहस हो गई थी। चुनांचे उस सहाबी ने बताया कि आपने एक अंसारी औरत को, जिसके पास एक बढ़ई दास था, कहला भेजा कि अपने दास से कहो कि मेरे लिए एक मिंबर बना दे, जिसपर बैठकर मैं लोगों से बात कर सकूँ। उस औरत ने आपके आदेश का पालन करते हुए अपने दास को आपके लिए झाऊ पेड़ की लकड़ी का एक मिंबर बनाने का आदेश दिया। जब मिंबर बनकर तैयार हो गया, तो उस औरत ने उसे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास भेज दिया। फिर आपके आदेश से उसे मस्जिद के अंदर उसके स्थान पर रख दिया गया। फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसपर खड़े होकर नमाज़ पढ़ी। तकबीर उसी पर खड़े होकर कही, फिर रुकू उसी पर खड़े होकर किया, फिर मिंबर से उतरकर पीछे की ओर चेहरा घुमाए बिना गए, मिंबर के पास सजदा किया और फिर मिंबर पर आ गए। जब नमाज़ पूरी हो गई, तो लोगों को संबोधित करते हुए कहा : लोगो! मैंने ऐसा इसलिए किया, ताकि तुम मेरा अनुसरण कर सको और मेरी नमाज़ सीख सको।
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