हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है। हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है।" फिर तीसरी बार फ़रमा…
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है। हर दो अज़ानों के बीच…
हदीस की व्याख्या: हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है। हर दो अज़ानों के बीच…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बयान फ़रमाया कि हर अज़ान व इक़ामत के बीच में नफ़ल नमाज़ है। इस वाक्य को आपने तीन बार दोहराया और तीसरी बार फ़रमाया कि यह नमाज़ उसके लिए मुसतहब है, जो पढ़ना चाहे।
सीख: हर दो अज़ानों के बीच में नमाज़ है। हर दो अज़ानों के बीच…
- अज़ान और इक़ामत के बीच में नमाज़ पढ़ना मुसतहब है।
- अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बात को दोहरा दिया करते थे, ताकि सुनने वाले इच्छी तरह सुन लें और कही गई बात के महत्व पर ज़ोर दिया जा सके।
- "अज़ानैन" (दो अज़ानों) से मुराद : अज़ान और इक़ामत है। और इन दोनों के लिए अज़ान का नाम 'तग़लीब' (प्रधानता देने के नियम) के तौर पर लागू किया गया है, जैसे 'क़मरैन' (दो चाँद) से मुराद सूरज और चाँद होते हैं, और 'उमरैन' (दो उमर) से मुराद अबू बक्र और उमर होते हैं।
- अज़ान समय के प्रवेश करने का एलान है और इक़ामत नमाज़ की उपस्थित की सूचना है।
श्रेणियाँ :
इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह
· नमाज़
· फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
· अज़ान तथा इक़ामत
· नफ़ल नमाज़
بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
سبحان الله وبحمده
अल्लाह की महिमा और स्तुति है