इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसें

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«इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह» पर 746 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ एक रात में दो वित्र नहीं हैं। सह़ीह़ सुबह होने से पहले वित्र की नमाज़ पढ़ लो। सह़ीह़ जिसने सुबह होने से पहले वित्र नहीं पढ़ी तथा सुबह हो गई, तो उसके लिए वित्र नहीं। सह़ीह़ जो सोया रह जाए और वित्र न पढ़ सके, अथवा भूल जाए, तो उसे चाहिए कि जब याद आए तब पढ़ ले। सह़ीह़ जिसको यह डर हो कि वह रात के अंतिम भाग में नहीं उठ पाएगा तो उसे चाहिए कि प्रथम भाग में ही वित्र पढ़ ले, और जिसे गुमान हो कि वह अंतिम भाग में उठ जाएगा उ सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- चाश्त की नमाज़ चार रकअत पढ़ा करते थे, और जितना अल्लाह चाहता उतना उसमें ज्यादा करते। सह़ीह़ क्या नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- चाश्त की नमाज़ पढ़ा करते थे? उन्होंने कहा : नहीं, सिवाय तब जब आप किसी यात्रा से लौट कर आते। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कोई अमल पसंद होता, इसके बावजूद उसे इस डर से छोड़ देते कि कहीं लोग उसपर अमल करने लगें और उनपर फ़र्ज़ कर दि सह़ीह़ अव्वाबीन (नेक लोगों) की नमाज़ उस समय होती है जब ऊँट के बच्चों के पाँव जलने लगें। स़ह़ीह़ “जमात के साथ नमाज़ अकेले की नमाज़ से सवाब में पच्चीस दर्जे ज़्यादा है और रात दिन के फरिश्ते फज्र की नमाज़ में जमा होते हैं।” स़ह़ीह़ क्या तुम नमाज़ के लिए पुकारी जाने वाली अज़ान को सुनते हो?” उसने कहा : हाँ, सुनता हूँ, तो आप ने फ़रमाया : “फिर तो तुम अवश्य उसको ग्रहण करो (अर्थाथ; माज सह़ीह़ जो अज़ान सुने लेकिन नमाज़ पढ़ने के लिए (मस्जिद) न आए, उसकी नमाज़ नहीं, सिवाय तब जब कि उसके पास कोई उज़्र (मजबूरी) हो। सह़ीह़ ऐसा न करो, जब तुम में से कोई अपने घर में (फ़र्ज़) नमाज़ पढ़ चुका हो, फिर वह इमाम को नमाज़ पढ़ाते हुए पाए , तो उसे चाहिए कि इमाम के साथ नमाज़ पढ़ ले, य सह़ीह़ एक दफा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम घोड़े पर सवार हुए तो उससे गिर गए, जिस के कारण आपका दायां पहलू जख़्मी हो गया। सह़ीह़ आगे बढ़ो तथा मेरा अनुसरण करो, तथा तुम्हारा अनुसरण तुम्हारे पीछे वाले करें, (याद रखो) लोग बराबर पीछे हटते रहते हैं यहां तक कि अल्लाह भी उन्हें पीछे कर सह़ीह़ ऐ लोगो ! अपने घरों में नमाज़ पढ़ा करो, क्योंकि मनुष्य की सर्श्रेष्ठ नमाज़ उस के घर में होती है, सिवाय फर्ज़ नमाज़ों के। सह़ीह़ क्या आप मुझ से अल्लाह के -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के रोग के संबंध में नहीं बताएंगीं? उन्होंने कहाः क्यों नहीं, जब आप बीमार थे तो आप ने पूछाः क्या लो सह़ीह़ ऐ लोगो ! तुम नफ़रत फैला रहे हो, जो लोगों को नमाज़ पढ़ाए उसे चाहिए कि हल्की नमाज़ पढ़ाए, उन में रोगी भी होते हैं, कमज़ोर भी तथा ज़रूरत मंद भी। सह़ीह़ फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो और फ़लाँ नमाज़ को फ़लाँ समय में पढ़ो,जब नमाज़ का समय हो जाए तो तुम में से एक व्यक्ति अज़ान दे तथा तुम में से जो क़ुर सह़ीह़ जो क़ुरआन को सर्वाधिक याद रखता हो वह लोगों की इमामत करे। स़ह़ीह़ ''पुरुषों के लिए सर्वोत्तम सफ़ सबसे प्रथम सफ है और सबसे बुरी सफ़ सबसे अंतिम सफ़ है। जबकि महिलाओं के लिए सबसे अच्छी सफ़ अंतिम सफ़ है तथा सबसे बुरी सफ़ सह़ीह़ "ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर रख दे, मेरी आँख में नूर रख दे, मेरे कान में नूर रख दे, मेरे दाएँ नूर रख दे, मेरे बाएँ नूर रख दे, मेरे ऊपर नूर रख दे, मेरे सह़ीह़ मैंने और यतीम ने, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पीछे अपने घर में नमाज़ पढ़ी और मेरी माँ उम्मे सुलैम हमारे पीछे थीं। सह़ीह़ अल्लाह तआला तुम्हारे शौक़ (चाह, अभिरुचि) में वृद्धि करे, लेकिन पुनः ऐसा न करना। ह़सन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक व्यक्ति को सफ़ के पीछे अकेले नमाज़ पढ़ते हुए देखा, तो उसे नमाज़ दोहराने का आदेश दिया। स़ह़ीह़ “यह दो नमाज़ें मुनाफिकों के लिए सर्वाधिक कठिन हैं और यदि वह जान लेते कि इनमें कितना सवाब है, तो वे अवश्य आते, चाहे (हाथ एवं) घुटनों के बल घिसटते हुए ह ह़सन उम्मे वरक़ा बिन्ते अब्दुल्लाह बिन हारिस अंसारी से वर्णित है कि उन्होंने क़ुरआन हिफ़्ज़ (कंठस्थ) किया था, (और) नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उन्हें सह़ीह़ नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इब्ने उम्मे मकतूम को अपना ख़लीफा (उत्तराधिकारी) बनाया था जो लोगों की इमामत करते थे, जबकि वह अंधे आदमी थे। सह़ीह़ तुममें से जो कोई नमाज़ पढ़ने के लिए आए तो उसे चाहिए कि वह वैसी ही अवस्था में हो जाए जैसा इमाम कर रहा है। स़ह़ीह़ इसे तीन बार, पाँच बार या -ज़रूरत महसूस हो तो- इससे अधिक बार पानी तथा बेरी के पत्तों से नहला दो और अंतिम बार काफ़ूर -या थोड़ा सा काफ़ूर- डाल दो। स्नान सह़ीह़ मुझे हज्जतुल वदा के अवसर पर अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हज कराया गया, जबकि उस समय मेरी आयु सात साल थी। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक ऊँट पर बैठकर हज किया, जिसमें आपके खाने के सामान तथा अन्य वस्तुएँ रखी थीं। सह़ीह़ अल्लाह के रास्ते में - एक दिन एवं एक रात की पहरेदारी महीना भर के रोज़ा और तहज्जुद से उत्तम है। अगर वह मर गया, तो उसका वह अमल जारी रहेगा, जो वह क्या कर स़ह़ीह़ जब रमज़ान आए, तो तुम उमरा कर लो। क्योंकि रमज़ान में किया गया उमरा हज के बराबर है। सह़ीह़ नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- प्रत्येक रमज़ान में दस दिन एतेकाफ़ करते थे। परन्तु जब मृत्यु का वर्ष आया, तो बीस दिन एतेकाफ़ किया। सह़ीह़ उकाज़, मजिन्ना और ज़ुल-मजाज़ जाहिलियत काल के बाज़ार थे। पर सहाबा ने हज के दिनों में व्यापार करने को पाप समझा, तो यह आयत उतरीः "ليس عليكم جناح أن تبتغو सह़ीह़ प्रत्येक मरने वाले का अमल मृत्यु के बाद बंद हो जाता है। हाँ, मगर अल्लाह की राह में पहरेदारी करने वाले की बात अलग है। उसका अमल क़यामत के दिन तक बढ़ता र स़ह़ीह़ “जिसने हज किया तथा हज के दिनों में बुरी बात एवं बुरे कार्यों से बचा एवं अवज्ञा से दूर रहा, वह उस दिन की तरह लौटेगा, जिस दिन उसकी माँ ने उसे जन्म दिया स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल! हम ज़िहाद को सबसे उत्तम कार्य समझते हैं, तो क्या हम जिहाद न करें? आपने उत्तर दिया : "नहीं! तुम्हारे लिए सबसे उत्तम जिहाद वह हज है, ज सह़ीह़ नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने विशेष रूप से तैयार किए गए घोड़ों के बीच (जिन्हें खूब खिलाया जाता है फिर उस की खोराक कम कर दी जाती है ताकि उसे शक्ति स़ह़ीह़ जब क़यामत के दिन अल्लाह पहले के और बाद के तमाम लोगों को एकत्र करेगा, तो हर विश्वासघात करने वाले के लिए एक-एक झंडा ऊँचा किया जाएगा। कहा जाएगा : यह अमुक सह़ीह़ नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक यात्रा में थे कि आपके पास मुशरिकों का एक जासूस आया। स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हमें सात बातों का आदेश दिया है और सात जीचों से रोका है स़ह़ीह़ एक औरत अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ज़माने में होने वाले किसी युद्ध में निहत पाई गई, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने औरतों सह़ीह़ लोगो, दुश्मन से मुठभेड़ की कामना न करो, बल्कि अल्लाह से आफ़ियत (सलामती) तलब करो सह़ीह़ अल्लाह ने उसकी राह में जिहाद करने वाले की ज़िम्मेवारी ली है कि यदि वह मर गया, तो उसे जन्नत में दाख़िल करेगा या फिर पुण्य अथवा ग़नीमत के धन के साथ सुरक स़ह़ीह़ अल्लाह के मार्ग में एक दिन की पहरेदारी दुनिया और उसकी तमाम चीज़ों से बेहतर है स़ह़ीह़ जिसने युद्ध अल्लाह के शब्द को ऊँचा करने के लिए किया, उसका युद्ध अल्लाह की राह में है। स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दो चितकबरे, सींग वाले मेढ़ों की क़ुरबानी की। दोनों को अपने हाथ से ज़बह किया, बिस्मिल्लाह कहा, अल्लाहु अकबर क सह़ीह़ अल्लाह के रास्ते में एक सुब्ह अथवा एक शाम निकलना उन सारी वस्तुओं से बेहतर है, जिनपर सूरज निकलता तथा डूबता है सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ग़नीमत के माल से घोड़े के लिए दो और आदमी के लिए एक भाग दिया सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिन लोगों को जंगों में भेजते थे, उन में से कुछ लोगों को विशेष रुप से कुछ ग़नीमत का माल देते थे। यह सेना के आ सह़ीह़ बनू नजीर से प्राप्त धन अल्लाह ने अपने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहे व सल्लम) को बिना किसी युद्ध के प्रदान किया था और उसके लिए मुसलमानों ने घोड़े और ऊँट नहीं सह़ीह़ जो व्यक्ति अल्लाह के रास्ते में ज़ख़्मी हो जाए, वह क़यामत के दिन इस हाल में आएगा कि उसके ज़ख़्म से रक्त बह रहा होगा। उसका रंग तो रक्त का होगा, लेकिन स सह़ीह़ जिसने किसी को क़त्ल किया और उसके पास उसका प्रमाण भी हो, तो उसे उससे छीना हुआ सारा सामान मिलेगा सह़ीह़ हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ सात युद्धों में शामिल हुए और हम उनके दौरान टिड्डी खाते थे सह़ीह़ लोग क़ुबा में अभी सुब्ह की नमाज़ पढ़ ही रहे थे कि अचानक एक व्यक्ति उनके पास आकर बोलाः आज रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर क़ुरआन की आयत स़ह़ीह़ जब तुम अज़ान सुनो, तो तुम उसके समान कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है। स़ह़ीह़ इन्हें रहने दो; क्योंकि मैंने इन्हें वज़ू की हालत में पहने थे। सह़ीह़ बिलाल रात रहते ही अज़ान देते हैं, अतः तुम इब्ने उम्मे मकतूम की अज़ान सुनने तक खाते- पीते रहो
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.2 / 29.5
रोशनी 93%
12 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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