इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसें

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«इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह» पर 746 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इशा की नमाज़ में लेट किया तो उमर निकल कर आए और कहने लगेः ऐ अल्लाह के रसूल! महीलाऐँ एवं बच्चे सो गऐ हैँ।अतः सह़ीह़ अल्लाह उनकी क़ब्रों तथा घरों को आग से भर दे, उन्होंने हमें अस्र की नमाज़ से व्यस्त रखा , यहाँ तक कि सूरज डूब गया। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फज्र की नमाज़ पढ़ते तो आप के साथ मोमिन महीलाएँ, चादर ओढ़ कर नमाज़ के लिए आती थीं। फिर जब वापस जातीं तो कोई भ स़ह़ीह़ अल्लाह कहता है : आदम की संतान का हर अमल उसके लिए है, सिवाय रोज़े के कि रोज़ा केवल मेरे लिए है और मैं ही उसका बदला दूँगा। सह़ीह़ ऐ इसमाईल की संतान! तीरंदाज़ी करो; क्योंकि तुम्हारे पिता इसमाईल तीरंदाज़ थे। सह़ीह़ ऐ आइशा! उठो और वित्र पढ़ो। स़ह़ीह़ (ऐ अल्लाह! तू पवित्र एवं प्रशंसनीय है। तेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है)। तथा एक रिवायत में हैः मेरा हाथ आपके कदमों के भीतरी भाग पर पड़ा, जबकि आप मस्ज ह़सन सबसे उत्तम दान, अल्लाह की राह में टेंट की छाया उपलब्ध कराना, अल्लाह की राह में सेवक प्रदान करना या अल्लाह की राह में जवान मादा ऊँटनी देना है। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा गया कि कौन-सी नमाज़ सबसे उत्तम है? तो फ़रमायाः- देर तक खड़ा रहना। सह़ीह़ इसने कार्य थोड़ा किया और प्रतिफल बड़ा प्रदान किया गया। सह़ीह़ मैंने तुम्हें मिसवाक के प्रति बहुत ज़्यादा कहा है। सह़ीह़ कोई वस्तु माँगने में हद से ज्यादा आग्रह मत करो। क्योंकि तुममें से कोई व्यक्ति जब मुझसे कोई चीज़ माँगता है और मुझे पसंद न होेने के बावजूद उसका सवाल मुझ सह़ीह़ घोड़े के माथे की लट से क़यामत के दिन तक भलाई बाँध दी गई है स़ह़ीह़ मिसवाक (दातून) मुँह को साफ़ करने वाली और अल्लाह को प्रसन्न करने वाली वस्तु है। सह़ीह़ अल्लाह, शहीद के हर गुनाह को, क़र्ज़ के सिवा, क्षमा कर देगा स़ह़ीह़ पाँच नमाज़ें, एक जुमा दूसरे जुमे तक तथा एक रमज़ान दूसरे रमज़ान तक, इनके बीच में होने वाले गुनाहों का कफ़्फ़ारा- प्रायश्चित- बन जाते हैं, यदि बड़े गुना सह़ीह़ ऊपर वाला हाथ नीचे वाले हाथ से बेहतर है। ऊपर वाला हाथ खर्च करने वाला हाथ है और नीचे वाला हाथ माँगने वाला हाथ है स़ह़ीह़ मैंने आइशा रज़ियल्लाहु अनहा से पूछा कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब घर आते, तो सबसे पहले कौन-सा काम करते थे? उन्होंने उत्तर दिया : आप स सह़ीह़ तो सुनो, उसका धन वह है, जो उसने आगे भेज दिया और उसके वारिस का धन वह है, जो उसने पीछे छोड़ दिया सह़ीह़ सुबह से पहले वित्र पढ़ने में जल्दी करो सह़ीह़ बनू सलमा! तुम अपने अस्ल घरों ही में रहो, तुम्हारे क़दमों के निशान लिखे जाएँगे। तुम अपने अस्ल घरों ही में रहो, तुम्हारे क़दमों के निशान लिखे जाएँगे। स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के यहाँ एक व्यक्ति के बारे में बताया गया कि वह रात को सुबह होने तक सोया रहा। यह सुनकर आपने कहा : "वह एक ऐसा व सह़ीह़ तुम्हें बहुत से क्षेत्रों में विजय प्राप्त होगी और अल्लाह तुम्हारे लिए काफ़ी होगा। अतः तुममें से कोई तीरों से खेलने से ग़ाफ़िल न हो ह़सन अल्लाह के रास्ते में युद्ध करो क्योंकि जिसने दो-एक क्षणों के लिए भी अल्लाह के रास्ते में युद्ध किया, उसके लिए जन्नत वाजिब हो गई सह़ीह़ दस कार्य प्राकृतिक हैं; मूँछ काटना, दाढ़ी बढ़ाना, मिसवाक करना, नाक में पानी चढ़ाना, नाखून काटना, जोड़ों को धोना, बगल के बाल उखेड़ना, पेड़ू के बाल साफ़ स़ह़ीह़ शैतान तुममें से हर व्यक्ति के सर के पीछ रात में सोते समय तीन गाँठ लगा देता है और हर गाँठ पर यह कहकर फूँक मारता है कि सो जा, अभी रात बहुत बाक़ी है। स़ह़ीह़ ''अधिक से अधिक अल्लाह के लिए सजदा करो, इसलिए कि तुम्हारे हर एक सजदे के बदले अल्लाह तुम्हारा एक दर्जा ऊँचा करता है और तुम्हारे एक गुनाह को मिटा देता है सह़ीह़ जब तुममें से कोई रात को नमाज़ पढ़ने के लिए उठे और उसकी ज़बान पर क़ुरआन ठीक से न आ रहा हो और उसे पता न चल रहा हो कि क्या कुछ पढ़ रहा है, तो सो जाए स़ह़ीह़ जन्नत में एक द्वार है, जिसे रय्यान कहा जाता है। क़यामत के दिन उससे रोज़ेदार प्रवेश करेंगे। उनके सिवा कोई उस द्वार से प्रवेश नहीं करेगा। सह़ीह़ अल्लाह मूसा पर दया करे, उन्हें इससे भी अधिक कष्ट दिया गया, परन्तु सब्र से काम लिया स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- रमज़ान महीने के अंतिम दस दिनों में दूसरे दिनों की तुलना में कहीं अधिक इबादत में लीन रहा करते थे। सह़ीह़ हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए मिसवाक और वुज़ू का पानी तैयार रखते थे। फिर अल्लाह जितनी रात को चाहता आपको जगाता। तो आप उठते, वज़ू सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी महीने में रोज़ा न रखते, यहाँ तक कि हम सोचने लगते कि इस महीने में रोज़ा रखेंगे ही नहीं और किसी महीने में सह़ीह़ ईर्ष्या, केवल दो प्रकार के लोगों से रखना जायज़ है; एक वह व्यक्ति, जिसे अल्लाह ने धन प्रदान किया हो तथा उसने उस धन को सत्य के मार्ग में खर्च करने पर लग सह़ीह़ अल्लाह के भय से रोने वाला व्यक्ति उसी प्रकार जहन्नम में प्रवेश नहीं कर सकता, जिस प्रकार दूध थन में लौट नहीं सकता। सह़ीह़ कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है जो जन्नत में प्रवेश करने के बाद दुनिया की ओर लौटना चाहेगा, चाहे उसे धरती की सारी वस्तुएँ मिल जाएँ। हाँ, मगर शहीद की बात और है। स़ह़ीह़ जिस बंदे के क़दम अल्लाह के रास्ते में धूल धूसरित हो गए, उसे (जहन्नम की) आग नहीं छूएगी। ह़सन शहीद क़त्ल का दर्द केवल उतना ही महसूस करता है, जितना तुममें से कोई चींटी के डंक मारने से महसूस करता है। सह़ीह़ अल्लाह के मार्ग में जिहाद करने वाले की मिसाल उस व्यक्ति की तरह है, जो उसके अल्लाह के मार्ग में जिहाद से वापस आने तक लगातार रोज़ा रखे, नमाज़ पढ़े और क़ सह़ीह़ जिसने अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए एक घोड़ा सुरक्षित रखा तथा ऐसा अल्लाह पर ईमान और उसके वचन को सच मानते हुए किया तो क़यामत के दिन उसे उसके खाने, प स़ह़ीह़ ऐ अबू सईद! जो अल्लाह के रब होने, इस्लाम के धर्म होने और मुहम्मद के रसूल होने से संतुष्ट हो गया, उसके लिए जन्नत अनिवार्य हो गई। सह़ीह़ जिसने अल्लाह के मार्ग में एक तीर चलाया, वह उसके लिए एक गुलाम आजाद करने के बराबर है। स़ह़ीह़ जिसने ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, रमज़ान के रोज़े रखे, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। स़ह़ीह़ जिसने दो ठंडे समय की नमाज़ें पढ़ीं, वह जन्नत में जाएगा। सह़ीह़ जिस मुसलमान ने अल्लाह के मार्ग में तनिक समय तक भी अल्लाह के मार्ग में जिहाद किया, उसके लिए जन्नत अनिवार्य हो गई और जो अल्लाह की राह में ज़ख़्मी हुआ या स़ह़ीह़ जो ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) में कयाम करता है, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। सह़ीह़ अब्दुल्लाह अच्छा आदमी है अगर वह रात को नमाज़ पढ़ता। सह़ीह़ आपका क्या ख़याल है कि यदि मैं अल्लाह के मार्ग में जिहाद करते हुए मारा जाऊँ तो मेरे गुनाह माफ़ हो जाएँगे? सह़ीह़ कदापि नहीं, मैंने उसे एक धारीदार कपड़े अथवा चोगे के कारण जहन्नम की आग में जलते हुए देखा है, जिसे उसने ग़नीमत के धन से, बँटवारे से पहले ले लिया था। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात के प्रथम भाग में सोते और अंतिम भाग में उठकर नमाज़ पढ़ते थे। सह़ीह़ सबसे बड़ा प्रतिफल वाला सदक़ा कौन-सा है? आपने फरमायाः वह सदक़ा, जो तुम उस समय करो, जब तुम सेहतमंद एवं लोभी हो; तुम्हें निर्धन हो जाने का डर सताए और माल सह़ीह़ बहुत ख़ूब, यह तो बहुत लाभदायक माल है। यह तो वाकई लाभदायक धन है। जो कुछ तुमने कहा, उसे मैंने सुन लिया। मेरी राय यह है कि तुम इसे अपने रिश्तेदारों में ब स़ह़ीह़ जो अल्लाह के पथ में एक दिन रोज़ा रखेगा, उसके चेहरे को अल्लाह (जहन्नम की) आग से सत्तर साल दूर कर देगा। स़ह़ीह़ लोग उस समय तक भलाई में रहेंगे, जब तक इफ़तार करने में जल्दी करते रहेंगे। सह़ीह़ आज रोज़ा न रखने वाले नेकी ले गए। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मक्का विजय के वर्ष मक्का में दाखिल हुए तो आपके सिर पर लोहे की टोपी थी। जब उसे उतारा तो एक व्यक्ति ने आपके पास सह़ीह़ अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- काबे को बाएँ और मिना को दाएँ करके खड़े हुए और फ़रमायाः यही वह स्थान है, जहाँ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सह़ीह़ तुममें से कोई व्यक्ति जुमा के दिन हरगिज़ रोज़ा न रखे, मगर यह कि उससे पहले या उसके बाद भी एक दिन रख ले। सह़ीह़ ऐ उमर! क्या आपको पता नहीं कि आदमी का चचा उसके बाप के समान होता है? स़ह़ीह़ हम अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने में सदक़ा-ए-फ़ित्र, हर छोटे-बड़े, आज़ाद या ग़ुलाम की ओर से एक सा खाने की चीज़, या एक सा पनीर, या
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.5 / 29.5
रोशनी 92%
12 दिनों में अमावस्या
اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद