जब तुम नमाज़ पढ़ो तो अपनी सफ़ें सठीक कर लो। फिर तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे। फ…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: जब तुम नमाज़ पढ़ो तो अपनी सफ़ें सठीक कर लो। फिर तुममें…

عَنْ ‌حِطَّانَ بْنِ عَبْدِ اللهِ الرَّقَاشِيِّ قَالَ: صَلَّيْتُ مَعَ ‌أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ صَلَاةً، فَلَمَّا كَانَ عِنْدَ الْقَعْدَةِ قَالَ رَجُلٌ مِنَ الْقَوْمِ: أُقِرَّتِ الصَّلَاةُ بِالْبِرِّ وَالزَّكَاةِ، قَالَ: فَلَمَّا قَضَى أَبُو مُوسَى الصَّلَاةَ وَسَلَّمَ انْصَرَفَ فَقَالَ: أَيُّكُمُ الْقَائِلُ كَلِمَةَ كَذَا وَكَذَا؟ قَالَ: فَأَرَمَّ الْقَوْمُ، ثُمَّ قَالَ: أَيُّكُمُ الْقَائِلُ كَلِمَةَ كَذَا وَكَذَا؟ فَأَرَمَّ الْقَوْمُ، فَقَالَ: لَعَلَّكَ يَا حِطَّانُ قُلْتَهَا؟ قَالَ: مَا قُلْتُهَا، وَلَقَدْ رَهِبْتُ أَنْ تَبْكَعَنِي بِهَا، فَقَالَ رَجُلٌ مِنَ الْقَوْمِ: أَنَا قُلْتُهَا، وَلَمْ أُرِدْ بِهَا إِلَّا الْخَيْرَ، فَقَالَ أَبُو مُوسَى: أَمَا تَعْلَمُونَ كَيْفَ تَقُولُونَ فِي صَلَاتِكُمْ؟ إِنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَطَبَنَا فَبَيَّنَ لَنَا سُنَّتَنَا وَعَلَّمَنَا صَلَاتَنَا، فَقَالَ: «إِذَا صَلَّيْتُمْ فَأَقِيمُوا صُفُوفَكُمْ، ثُمَّ لِيَؤُمَّكُمْ أَحَدُكُمْ فَإِذَا كَبَّرَ فَكَبِّرُوا، وَإِذْ قَالَ: {غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلا الضَّالِّينَ} [الفاتحة: 7]، فَقُولُوا: آمِينَ، يُجِبْكُمُ اللهُ، فَإِذَا كَبَّرَ وَرَكَعَ فَكَبِّرُوا وَارْكَعُوا، فَإِنَّ الْإِمَامَ يَرْكَعُ قَبْلَكُمْ، وَيَرْفَعُ قَبْلَكُمْ»، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «فَتِلْكَ بِتِلْكَ، وَإِذَا قَالَ: سَمِعَ اللهُ لِمَنْ حَمِدَهُ، فَقُولُوا: اللَّهُمَّ رَبَّنَا لَكَ الْحَمْدُ، يَسْمَعِ اللهُ لَكُمْ، فَإِنَّ اللهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى قَالَ عَلَى لِسَانِ نَبِيِّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: سَمِعَ اللهُ لِمَنْ حَمِدَهُ، وَإِذَا كَبَّرَ وَسَجَدَ فَكَبِّرُوا وَاسْجُدُوا، فَإِنَّ الْإِمَامَ يَسْجُدُ قَبْلَكُمْ وَيَرْفَعُ قَبْلَكُمْ»، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «فَتِلْكَ بِتِلْكَ، وَإِذَا كَانَ عِنْدَ الْقَعْدَةِ فَلْيَكُنْ مِنْ أَوَّلِ قَوْلِ أَحَدِكُمُ: التَّحِيَّاتُ الطَّيِّبَاتُ الصَّلَوَاتُ لِلهِ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ».

हदीस की व्याख्या: जब तुम नमाज़ पढ़ो तो अपनी सफ़ें सठीक कर लो। फिर तुममें…

सहाबी अबू मूसा अशअरी रज़ियल्लाहु अनहु ने एक नमाज़ पढ़ी। जब वह उस बैठक में थे, जिसमें तशह्हुद पढ़ा जाता है, तो पीछे नमाज़ पढ़ रहे एक व्यक्ति ने कहा कि नमाज़ का ज़िक्र क़ुरआन में परोपकार तथा ज़कात के साथ किया गया है। जब नमाज़ ख़त्म हो गई, तो लोगों की ओर मुंह फेरते हुए उनसे पूछा कि तुममें से किसने कहा है कि नमाज़ का ज़िक्र क़ुरआन में परोपकार तथा ज़कात के साथ किया गया है? जब सब लोग ख़ामोश रहे और किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, तो सवाल दोबारा किया। लेकिन जब फिर भी किसी ने कोई उत्तर नहीं दिया, तो अबू मूसा रज़ियल्लाहु अनहु ने कहा कि ऐ हित्तान! शायद तुमने ही यह बात कही है? उन्होंने हित्तान से यह बात इसलिए कही थी कि वह एक दिलेर इन्सान थे और उनसे उनके गहरे संबंध और बड़ी निकटता थी, जिसके कारण इस बात की संभावना नहीं थी कि वह इस आरोप से आहत होते। साथ ही इसका उद्देश्य असल बात करने वाले को एतराफ़ करने पर उभारना भी था। चुनांचे हित्तान ने इससे मना कर दिया और कहा : मुझे पहले ही से इस बात का डर था कि यह समझ कर आप मुझे डाँटेंगे कि मैने यह बात कही है। यह सुन वहाँ मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि यह बात मैंने कही है और मेरा उद्देश्य कुछ बुरा नहीं था। इसपर अबू मूसा रज़ियल्लाहु अनहु ने उसे शिक्षा देते हुए फ़रमाया कि क्या तुम नहीं जानते तुम्हें अपनी नमाज़ में क्या कुछ कहना है और कैसे कहना है? यह दरअसल एक तरह से उनका खंडन था। फिर अबू मूसा अशअरी रज़ियल्लाहु अनहु ने बताया कि एक बार अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनको संबोधित किया और उनको उनकी शरीयत तथा नमाज़ सिखाई। चुनांचे आपने बताया :

जब तुम नमाज़ पढ़ो, तो अपनी सफ़ें सठीक तथा सीधी कर लिया करो। फिर एक व्यक्ति इमाम बनकर लोगों को नमाज़ पढ़ाए। चुनांचे जब इमाम तकबीर-ए-एहराम कहे, तो तुम भी उसी की तरह तकबीर-ए-एहराम कहो और जब वह सूरा फ़ातिहा पढ़ते हुए {غير المغضوب عليهم ولا الضالين} तक पहुँचे, तो तुम आमीन कहो। जब तुम ऐसा करोगे, तो अल्लाह तुम्हारी दुआ ग्रहण करेगा। फिर जब इमाम तकबीर कहे और रुकू में जाए, तो तुम भी तकबीर कहो और रुकू में जाओ। इमाम तुमसे पहले रुकू में जाएगा और तुमसे बाद में रुकू से उठेगा। अतः तुम उससे आगे न बढ़ो। तुम्हारे रुकू में जाने में जो क्षण भर की देर होगी, वह तुम्हारे रुकू से उठने में होने वाली क्षण भर की देर से पूरी हो जाएगी और इस तरह तुम्हारे रुकू की लंबाई इमाम के रुकू की लंबाई के बराबर हो जाएगी। फर जब इमाम "سمع الله لمن حمده" कहे, तो तुम "اللهم ربنا لك الحمد" कहो। जब नमाज़ी ऐसा कहते हैं, तो अल्लाह उनकी दुआ और कथन को स्वीकार कर लेता है। क्योंकि उच्च एवं महान अल्लाह ने अपने नबी की ज़बानी कहा कि अल्लाह ने उसकी सुन ली, जिसने उसकी प्रशंसा की। फिर जब इमाम तकबीर कहे और सजदे में जए, तो मुक़तदियों को भी तकबीर कहना और सजदे में जाना है। इमाम उनसे पहले सजदे में जाएगा और उनसे पहले सजदे से उठेगा। इस तरह उनके सजदे में जाने में जो क्षण भर की देर होगी, वह उनके सजदे से उठने में होने वाली क्षण भर की देर से पूरी हो जाएगी और इस तरह उनके सजदे की लंबाई इमाम के सजदे की लंबाई के बराबर हो जाएगी। फिर जब तशह्हुद के लिए बैठे, तो सबसे पहले यह दुआ पढ़े : "التحيات الطيبات الصلوات لله" यानी राज्य, नित्यता और महानता, इन सारी चीज़ों की योग्यता अल्लाह ही के लिए है। इसी तरह पाँचों नमाज़ें अल्लाह के लिए हैं। "السلام عليك أيها النبي ورحمة الله وبركاته، السلام علينا وعلى عباد الله الصالحين" फिर अल्लाह से हर ऐब, कमी और बुराई तथा फ़साद से सलामती की दुआ करो। फिर हम विशेष रूप से मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को सलाम भेजते हैं। फिर अपने आपको सलाम भेजते हैं। फिर अल्लाह के उन नेक बंदों को सलाम भेजते हैं, जो अल्लाह और उसके बंदों के अनिवार्य अधिकारों को अदा करते हैं। फिर हम इस बात की गवाही देते हैं कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई इबादत के योग्य नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के बंदे तथा रसूल हैं।

सीख: जब तुम नमाज़ पढ़ो तो अपनी सफ़ें सठीक कर लो। फिर तुममें…

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · नमाज़ · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · नमाज़ का तरीक़ा · इमाम तथा उसके पीछे नमाज़ पढ़ने वाले के अहकाम

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.6 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद