ईमान का बढ़ना और घटना पर हदीसें

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«ईमान का बढ़ना और घटना» पर 9 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

ईमान का बढ़ना और घटना पर हदीसों की सूची

स़ह़ीह़ मुसलमान वह है, जिसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान सुरक्षित रहें और मुहाजिर वह है, जो अल्लाह की मना की हुई चीज़ें छोड़ दे। स़ह़ीह़ मुझसे पहले अल्लाह ने जितने नबी भेजे, उनके लिए उनकी उम्मत में कुछ सहयोगी एवं साथी हुआ करते थे, जो उनकी सुन्नत पर अमल और उनके आदेश का पालन करते थे। स़ह़ीह़ ईमान की सत्तर से कुछ अधिक अथवा साठ से कुछ अधिक शाखाएँ हैं। जिनमें सर्वश्रेष्ठ शाखा 'ला इलाहा इल्लल्लाह' कहना है। जबकि सबसे छोटी शाखा रास्ते से कष्टदाय स़ह़ीह़ तुममें से जो व्यक्ति कोई ग़लत काम देखे, वह उसे अपने हाथ से बदल दे। अगर हाथ से बदल नहीं सकता, तो ज़बान से बदले। अगर ज़बान से बदल नहीं सकता, तो अपने दिल स़ह़ीह़ जिसने इस्लाम की हालत में अच्छे काम किए हैं, जाहिलियत के गुनाहों पर उसकी पकड़ नहीं होगी और जो आदमी इसलाम को त्याग कर दोबारा काफिर हो गया, तो पहले और बा स़ह़ीह़ हम अपने दिलों में ऐसी बातें पाते हैं, जिनको बोलना हमें बहुत बड़ा (गुनाह) लगता है। यह सुन आपने कहा : "क्या तुम सचमुच ऐसा महसूस करते हो?" उन्होंने कहा : स़ह़ीह़ ईमान तुम्हारे दिल में उसी तरह पुराना हो जाता है, जिस तरह पुराना कपड़ा जर्जर हो जाता है। इसलिए अल्लाह से दुआ करो कि तुम्हारे दिलों में ईमान को नया कर द स़ह़ीह़ उस व्यक्ति ने ईमान का मज़ा चख लिया, जो संतुष्ट हुआ अल्लाह से रब (उत्पत्तिकार, स्वामी, प्रबंधक) के तौर पर, इस्लाम से धर्म तथा मुहम्मद से संदेशवाहक के त स़ह़ीह़ हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ थे और हम वयस्क होने ही वाले थे। हमने क़ुरआन सीखने से पहले ईमान सीखा और उसके बाद क़ुरआन सीखा, तो इससे हमारा ईमान
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
سبحان الله अल्लाह की पवित्रता है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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