ज़िक्र की फ़ज़ीलतें पर हदीसें

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«ज़िक्र की फ़ज़ीलतें» पर 24 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

ज़िक्र की फ़ज़ीलतें पर हदीसों की सूची

स़ह़ीह़ मैं तुमसे क़सम इसलिए नहीं ले रहा हूँ कि तुमपर कोई आरोप लगाना चाहता हूँ। दरअसल बात यह है कि जिबरील अलैहिस्सलाम मेरे पास आए और बताया कि सर्वशक्तिमान एवं स़ह़ीह़ क्या मैं तुम्हें तुम्हारा सबसे उत्तम कार्य न बताऊँ, जो तुम्हारे रब के निकट सबसे ज़्यादा सराहनीय, तुम्हारे दरजे को सबसे ऊँचा करने वाला स़ह़ीह़ अतुल्य विशेषता वाले लोग आगे हो गए। शवाहिद के आधार पर ह़सन जिस रात मुझे मेराज कराई गई, उस रात मैं इब्राहीम अलैहिस्सलाम से मिला। तो इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने मुझसे कहा : ऐ मुहम्मद! अपनी उम्मत को मेरा सलाम कहना और स़ह़ीह़ जो लोग किसी सभा से अल्लाह का ज़िक्र किए बिना उठ जाते हैं, वे वैसे हैं जैसे मरे हुए गधे के पास से उठते हैं, और यह उनके लिए पछतावे का कारण बनेगा। स़ह़ीह़ “‎क्या अल्लाह ने तुम्हारे लिए वह चीज़ें नहीं बनाई हैं, जिनसे तुम सदक़ा कर सकते हो? हर तस्बीह (सुब्हानल्लाह कहना) सदक़ा है, हर तकबीर (अल्लाहु अकबर कहना स़ह़ीह़ तुम्हारी ज़बान हमेशा अल्लाह के ज़िक्र से तर रहे। स़ह़ीह़ ऐ लोगो! अल्लाह के सामने तौबा करो, क्योंकि खुद मैं दिन में सौ बार तौबा करता हूँ। स़ह़ीह़ एक बंदे ने एक गुनाह किया और उसके बाद कहा : ऐ अल्लाह, मुझे मेरे गुनाह क्षमा कर दे सह़ीह़ एक खुजूर का तना था, जिसपर खड़े होकर अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमा का प्रवचन देते थे। फिर जब मिंबर रखा गया तो हमने उस तने से दस माह की सह़ीह़ क्या मैं तुम्हें वह शब्द न बताऊँ, जो अल्लाह के निकट सबसे प्रिय है? अल्लाह के निकट सबसे प्रिय शब्द हैः 'سبحان اللهِ وبحمدِهِ' (अर्थात अल्लाह पवित्र है सह़ीह़ उस ज़ात (अल्लाह) की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, यदि तुम लोग गुनाह न करो, तो अल्लाह तुम्हारा विनाश करके ऐसे लोगों को ले आए, जो गुनाह करें और उसके शवाहिद के आधार पर सह़ीह़ शेष रहने वाली नेक चीज़ें हैंः ला इलाहा इल्लल्लाह (अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है), सुबहान अल्लाह (अल्लाह पाक है), अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड सह़ीह़ लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों से मिलकर सह़ीह़) आदम की संतान ने कोई ऐसा कार्य नहीं किया, जो उसे अल्लाह के ज़िक्र की तुलना में अल्लाह के अज़ाब से अधिक बचाने वाला हो। स़ह़ीह़ “जिसने दिन भर में सौ बार 'सुबहानल्लाहि व बिह़म्दिहि' (अल्लाह के लिए पवित्रता है उसकी प्रशंसा के साथ) कहा, उसके सारे पाप क्षमा कर दिए जाएँगे, यद्यपि वे स़ह़ीह़ “जिसने दस बार 'ला इलाहा इल्लल्लाहु वह़दहु ला शरीका लहु, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर' (अर्थात, अल्लाह के सिवा कोई वास्तविक प सह़ीह़ लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों से मिलकर सह़ीह़) अल्लाह तआला फ़रमाता हैः मैं अपने बंदे के साथ होता हूँ, जब वह मेरा स्मरण करता है तथा मुझे याद करने के लिए अपने होंठों को हरकत देता है। सह़ीह़ उस ज़ात की क़सम, जिसके हाथों में मेरा प्राण है, यदि तुम लोग उसी हालत में हमेशा रहो, जिस हालत में मेर पास होते हो तथा उसी प्रकार ज़िक्र करते रहो, तो फ़ सह़ीह़ अल्लाह ने अपने नबी को आवाज़ को सुरीली बनाने की जिस प्रकार अनुमति दी है किसी और वस्तु की नहीं दी स़ह़ीह़ जब मुअज़्ज़िन "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" (अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर) कहता है और (उसके उत्तर में) तुममें से कोई "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" ( स़ह़ीह़ जब तुम मुअज़्ज़िन को अज़ान देते हुए सुनो, तो उसी तरह के शब्द कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है। फिर मुझपर दरूद भेजो स़ह़ीह़ यह एक शैतान है, जिसे ख़िंज़िब कहा जाता है। जब तुम्हें उसके व्यवधान डालने का आभास हो, तो उससे अल्लाह की शरण माँगो और तीन बार अपने बाएँ ओर थुत्कारो स़ह़ीह़ तेरी ज़बान हमेशा अल्लाह के ज़िक्र से तर रहे सह़ीह़ ज़िक्र की मज़लिसों की फ़ज़ीलत से संबंधित हदीसें
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.6 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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