इस्लाम > Hi > हदीस > फजलत तथ आदब > जिसने किसी मोमिन से दुनिया की परेशानियों में से कोई परेशानी दूर की, अल्लाह उससे क़यामत के…
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27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 2 मिनट पढ़ने का समयعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «مَنْ نَفَّسَ عَنْ مُؤْمِنٍ كُرْبَةً مِنْ كُرَبِ الدُّنْيَا نَفَّسَ اللهُ عَنْهُ كُرْبَةً مِنْ كُرَبِ يَوْمِ الْقِيَامَةِ، وَمَنْ يَسَّرَ عَلَى مُعْسِرٍ يَسَّرَ اللهُ عَلَيْهِ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، وَمَنْ سَتَرَ مُسْلِمًا سَتَرَهُ اللهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، وَاللهُ فِي عَوْنِ الْعَبْدِ مَا كَانَ الْعَبْدُ فِي عَوْنِ أَخِيهِ، وَمَنْ سَلَكَ طَرِيقًا يَلْتَمِسُ فِيهِ عِلْمًا سَهَّلَ اللهُ لَهُ بِهِ طَرِيقًا إِلَى الْجَنَّةِ، وَمَا اجْتَمَعَ قَوْمٌ فِي بَيْتٍ مِنْ بُيُوتِ اللهِ يَتْلُونَ كِتَابَ اللهِ وَيَتَدَارَسُونَهُ بَيْنَهُمْ إِلَّا نَزَلَتْ عَلَيْهِمِ السَّكِينَةُ، وَغَشِيَتْهُمُ الرَّحْمَةُ، وَحَفَّتْهُمُ الْمَلَائِكَةُ، وَذَكَرَهُمُ اللهُ فِيمَنْ عِنْدَهُ، وَمَنْ بَطَّأَ بِهِ عَمَلُهُ لَمْ يُسْرِعْ بِهِ نَسَبُهُ».
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बताया है कि अल्लाह के यहाँ मुसलमान को उसी के अनुरूप प्रतिफल मिलता है, जो वह मुसलमानों के साथ करता है। जिसने इस संसार की कठिनाइयों और संकटों में से किसी भी कठिनाइ और संकट को किसी मुस्लिम से दूर किया, बदले में अल्लाह उसे क़यामत के दिन की कठिनाइयों में से किसी कठिनाइ से मुक्ति प्रदान करेगा। जो व्यक्ति तंगी में पड़े हुए किसी व्यक्ति को सहूलत प्रदान करता है और उसकी कठिनाई को दूर करता है, अल्लाह उसके लिए इस दुनिया और आख़िरत दोनों जगह में सहूलत पैदा करेगा। जो व्यक्ति किसी मुसलमान की गलतियों और त्रुटियों को छुपाता है, अल्लाह उसकी कमियों एवं त्रुटियों पर इस दुनिया और आख़िरत में पर्दा डालेगा। अल्लाह अपने बंदे की मदद करता रहता है, जब तक बंदा अपने भाई की धार्मिक और सांसारिक हितों में सहायता करता है। यह सहायता दुआ, शारीरिक श्रम, धन और अन्य तरीकों से की जा सकती है। जो व्यक्ति अल्लाह की प्रसन्नता के उद्देश्य से शरई ज्ञान प्राप्त करने के मार्ग में निकलता है, अल्लाह उसके लिए इस कार्य के माध्यम से जन्नत का मार्ग आसान कर देता है। जब भी कोई समूह अल्लाह के घरों में से किसी एक घर में एकत्र होता है, अल्लाह की किताब का पाठ करता है तथा आपस में उसका अध्ययन करता है, तब उनपर शांति और सुकून उतरता है, अल्लाह की दया उन्हें ढाँप लेती है, फरिश्ते उन्हें घेरे रहते हैं, अल्लाह अपने निकटवर्ती लोगों (फरिश्तों) में उनकी प्रशंसा करता है। ज़रा सोचिए कि अल्लाह के द्वारा निकटवर्तियों के बीच किसी की प्रशंसा हो जाना कितने बड़े सौभाग्य की बात है। जिसका कर्म अपूर्ण हो उसका वंश उसे कर्मशील समकक्षों की श्रेणी में नहीं ला सकता। इस लिए उसे अपने वंश एवं पूर्वजों की प्रतिष्ठा पर निर्भर नहीं होना चाहिए तथा कर्तव्यों के पालन में कमी नहीं करनी चाहिए।
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