इस्लाम > Hi > हदीस > इबदत पर आधरत फकह > “यह दो नमाज़ें मुनाफिकों के लिए सर्वाधिक कठिन हैं और यदि वह जान लेते कि इनमें कितना सवाब ह…
स़ह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 2 मिनट पढ़ने का समयअल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक दिन फ़ज्र की नमाज़ पढ़ी और उसके बाद पूछा कि क्या हमारी इस नमाज़ में अमुक व्यक्ति है? सहाबा ने उत्तर दिया : नहीं। फिर आपने एक और व्यक्ति के बारे में पूछा : क्या अमुक व्यक्ति मौजूद है? सहाबा ने जवाब दिया : नहीं। तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : निस्संदेह फ़ज्र एवं इशा की नमाज़ें मुनाफ़िक़ों पर सबसे भारी हैं, क्योंकि इन दोनों समयों में सुस्ती हावी रहती है दिखावे की संभावना कम रहती है कि अंधेरे के कारण कोई देख नहीं सकता।
ऐ मोमिनो! अगर तुम जान लो कि सुबह तथा इशा की नमाज़ में कितना अतिरिक्त सवाब है, (क्योंकि सवाब मशक़्क़त के अनुरूप मिला करता है) तो तुम इन दोनों नमाज़ों में ज़रूर पहुँचोगे। चाहे घुटनों और हाथों के बल चलकर ही क्यों न पहुँचना पड़े।
निश्चय ही पहली सफ़ उसमें खड़े लोगों के इमाम से क़रीब होने के मामले में फ़रिश्तों की सफ़ के समान है अल्लाह से निकट होने के मामले में। अगर ईमान वाले पहली सफ़ की फ़ज़ीलत से अवगत हो जाएँ, तो उसमें जगह पाने के लिए प्रतिस्पर्धा करने लगेंगे। एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति के साथ नमाज़ पढ़ना अकेले नमाज़ पढ़ने की तुलना में अधिक सवाब रखता है। और दो व्यक्ति के साथ नमाज़ पढ़ना एक व्यक्ति के साथ नमाज़ पढ़ने से अधिक सवाब रखता है। जिस नमाज़ में नमाज़ियों की संख्या अधिक हो, वह अल्लाह के निकट अधिक प्रिय एवं उत्तम है।
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