इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > जमात के साथ पढ़ी गई नमाज़ अकेले पढ़ी गई नमाज़ के मुक़ाबले में सत्ताईस दरजा श्रेष्ठ है।
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ: «صلاةُ الجَمَاعَة أَفضَلُ من صَلاَة الفَذِّ بِسَبعٍ وعِشرِين دَرَجَة».
यह हदीस़ जमाअत के साथ पढ़ी गई नमाज़ के अकेले पढ़ी गई नमाज़ से उत्तम होने का उल्लेख करते हुए कहती है कि जमाअत वाली नमाज़ (अन्य महत्वपूर्ण फ़ायदों और लाभों के अतिरिक्त) अकेले की नमाज़ से सत्ताईस गुना अधिक सवाब रखती है। क्योंकि दोनों नमाज़ों के बीच उद्देश्य की पूर्ति के मामले में ज़मीन आसमान का अंतर है तथा इस बात में किसी संदेह की गुंजाइश नहीं है कि जिसने इस बड़े लाभ को नष्ट कर दिया, वही वास्तव में वंचित व्यक्ति है।
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