इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > आपका क्या ख़याल है कि यदि मैं अल्लाह के मार्ग में जिहाद करते हुए मारा जाऊँ तो मेरे गुनाह म…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن أبي قتادة الحارث بن رِبْعِيِّ رضي الله عنه عن رسول الله صلى الله عليه وسلم : أَنَّهُ قامَ فيهم، فذكرَ لهم أَنَّ الجهادَ في سبيلِ اللهِ، والإيمانَ باللهِ أفضلُ الأعمالِ، فقامَ رَجُلٌ، فقال: يا رسولَ اللهِ، أرأيتَ إن قُتِلْتُ في سبيلِ اللهِ، تُكَفَّرُ عَنِّي خَطَايَايَ؟ فقالَ له رسولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم : «نعم، إنْ قُتِلْتَ في سبيلِ اللهِ، وأنتَ صَابِرٌ مُحْتَسِبٌ، مُقْبِلٌ غَيْرُ مُدْبِرٍ». ثم قال رسولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم : «كَيْفَ قُلْتَ؟» قال: أَرَأَيتَ إنْ قُتِلْتُ في سَبِيلِ اللهِ، أَتُكَفَّرُ عَنِّي خَطَايَايَ؟ فقالَ له رسولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم : «نعم، وأنتَ صَابِرٌ مُحْتَسِبٌ، مُقْبِلٌ غَيْرُ مُدْبِرٍ، إلا الدَّيْنَ؛ فَإنَّ جِبْرِيلَ -عليه السلام- قالَ لِي ذَلِكَ».
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने साथियों के बीच उन्हें संबोधित करने के लिए खड़े हुए और बताया कि अल्लाह के पताका को ऊँचा करने के लिए जिहाद करना और अल्लाह पर ईमान रखना सबसे उत्तम कार्य हैं। यह सुन एक व्यक्ति खड़ा हुआ और अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा : मुझे ज़रा यह बताएँ कि यदि अल्लाह के पताका को ऊँचा करने के लिए युद्ध करते हुए मेरा वध होजाए, तो क्या मेरे गुनाह माफ़ कर दिए जाएँगे? अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उत्तर दिया : हाँ, लेकिन शर्त यह है कि तुम धैर्यवान रहो, कष्ट के समय सहन करो, अल्लाह के प्रति निष्ठावान रहो और युद्ध के मैदान से भागने की बजाय डटकर मुक़ाबला करो। फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक और चीज़ यानी क़र्ज़ का ज़िक्र किया, यह दर्शाने के लिए कि अल्लाह के मार्ग में युद्ध करने और प्राण की आहुति देने से भी अन्य इनसानों के अधिकार माफ़ नहीं होते।
श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · जिहाद · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · जिहाद की फ़ज़ीलत