जो अपने धन की रक्षा करते हुए मारा जाए वह शहीद है, जो अपने घर वालों की रक्षा करते हुए मारा …

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: जो अपने धन की रक्षा करते हुए मारा जाए वह शहीद है, जो अप…

عن سعيد بن زيد، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «من قُتِلَ دُون مَالِهِ فهو شَهيدٌ، ومن قُتِلَ دُون أهْلِهِ، أو دُونَ دَمِهِ، أو دُون دِيْنِهِ فهو شَهيدٌ».

हदीस की व्याख्या: जो अपने धन की रक्षा करते हुए मारा जाए वह शहीद है, जो अप…

यह हदीस बताती है कि जिसके सामने कोई चोर अथवा ज़बरदस्ती छीनने वाला आ जाए और ताक़त के बल पर बिना किसी शरई अधिकार के उसके धन पर क़ब्ज़ा करना चाहे, तो वह अपने धन की रक्षा के लिए उससे युद्ध करे। अगर वह अपने धन की रक्षा में मारा जाता है, तो वह अल्लाह के यहाँ शहीद माना जाएगा और उसे शहीद का सवाब मिलेगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह युद्ध के मैदान में लड़ते हुए प्राण की आहुति देने वाले की तरह शहीद है और उसे ग़ुस्ल नहीं दिया जाएगा। इसी तरह जो अपने प्राण की रक्षा अथवा किसी ऐसे व्यक्ति से अपनी इज़्ज़त की रक्षा करते हुए मारा जाता है, जो उसकी पत्नी अथव किसी अन्य महरम स्त्री के साथ बुराई का इरादा रखे, तो उसे भी शहीद के बराबर सवाब मिलेगा। यह हदीस उत्पीड़णकर्ता से बचाव के संबंध में फ़क़ीहों के यहाँ एक आधार की भूमिका अदा करती है।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · जिहाद · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · जिहाद के अहकाम तथा मसायल

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13 दिनों में अमावस्या
اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद