तुम लोग मुझसे इस बात पर बैअत करो कि तुम किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाओगे, चोरी नहीं करोग…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: तुम लोग मुझसे इस बात पर बैअत करो कि तुम किसी को अल्लाह…

हदीस की व्याख्या: तुम लोग मुझसे इस बात पर बैअत करो कि तुम किसी को अल्लाह…

उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहु अनहु, जो महान बद्र युद्ध में शामिल हुए थे और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के मदीना हिजरत करने से पहले मक्का में मौजूदगी के दौरान अक़बा की रात मिना में आपके सहयोग की प्रतिज्ञा लेने वाले प्रतिनिधि मंडल के सरदार थे, बताते हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने सहाबा के बीच बैठे हुए थे कि उनसे निम्नलिखित बातों पर बैअत करने को कहा : 1- अल्लाह की इबादत में किसी को साझी नहीं बनाएँगे। 2- चोरी नहीं करेंगे। 3- व्यभिचार में संलिप्त नहीं होंगे। 4- अपने बच्चों की हत्या नहीं करेंगे। ग़रीबी के डर से बच्चों की और शर्म के डर से बच्चियों की। 5- ऐसा झूठ सामने नहीं बोलेंगे, जिसे उन्होंने हाथों और पैरों के दरमियान गढ़ लिया हो। क्योंकि अधिकतर गुनाह उन्हीं के द्वारा होते हैं, यद्यपि दूसरे अंग भी गुनाह में शामिल हो जाएँ। 6- किसी नेकी के काम में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की अवज्ञा नहीं करेंगे। बैअत करने वालों में से जो इस बैअत का पालन करेगा, उसका प्रतिफल देना अल्लाह का काम है। और जो ऊपर बयान किए गए गुनाहों में से शिर्क को छोड़कर किसी अन्य गुनाह में संलिप्त होगा, और दुनिया में उसे उसका शरई दंड मिल गया, तो यह दंड उसके लिए प्रायश्चित बन जाएगा और फलस्वरूप वह पाक-साफ़ हो जाएगा। इसके विपरीत जो व्यक्ति इनमें से किसी गुनाह में संलिप्त होगा और उसके बाद अल्लाह ने उसके गुनाह पर पर्दा डाल दिया, तो फिर मामला अल्लाह के हाथ में रहेगा। चाहे तो माफ़ कर दे और चाहे तो दंड दे। चुनांचे उपस्थित सभी लोगों ने आपके हाथ पर इन बातों की प्रतिज्ञा ली।

सीख: तुम लोग मुझसे इस बात पर बैअत करो कि तुम किसी को अल्लाह…

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الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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