“संदेह में डालने वाली चीज़ों को छोड़कर संदेह में न डालने वाली चीज़ों को अपनाओ।
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे तिर्मिज़ी एवं नसई ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: “संदेह में डालने वाली चीज़ों को छोड़कर संदेह में न डालन…
عَنْ أَبِي مُـحَمَّدٍ الحَسَنِ بْنِ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ - سِبْطِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَيْحَانَتِهِ-، قَالَ: حَفِظْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «دَعْ مَا يَرِيبُك إلَى مَا لَا يَرِيبُكَ».
हदीस की व्याख्या: “संदेह में डालने वाली चीज़ों को छोड़कर संदेह में न डालन…
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ऐसी बातें कहने और ऐसे कार्य करने से दूर रहने का आदेश दिया है, जिनके बारे में संदेह हो कि वो निषिद्ध हैं या नहीं? हलाल हैं या हराम? इन्सान को ऐसी बातें और ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनके अच्छे और हलाल होने का विश्वास हो।
सीख: “संदेह में डालने वाली चीज़ों को छोड़कर संदेह में न डालन…
- मुसलमान पर लाज़िम है कि अपने तमाम मामलात की बुनियाद यक़ीन पर रखे और सूझ-बूझ एवं आगही के साथ दीन पर अमल करे।
- संदिग्ध चीज़ों में पड़ने की मनाही।
- अगर आप इत्मीनान और सुकून चाहते हैं, तो संदिग्ध चीज़ों से बचें।
- अल्लाह सर्वशक्तिमान अपने बन्दों के प्रति दयालु और कृपालु है, क्योंकि उसने उन्हें ऐसे काम करने का आदेश दिया है जो मन और दिल को शांति प्रदान करते हैं और उन्हें ऐसे काम करने से मना किया है जो बेचैनी और भ्रम का कारण बनते हैं।
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उसूल-ए-फ़िक़्ह
· दो प्रमाणों के बीच टकराव तथा तरजीह
· फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
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मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
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