निश्चय ही, अल्लाह तआला बंदे की तौबा उस समय तक कबूल करता है, जब तक उसकी जान गले में न आ जाए…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।

ह़सन

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: निश्चय ही, अल्लाह तआला बंदे की तौबा उस समय तक कबूल करता…

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «إن الله عز وجل يقبل تَوْبَةَ العَبْدِ ما لم يُغَرْغِرْ».

हदीस की व्याख्या: निश्चय ही, अल्लाह तआला बंदे की तौबा उस समय तक कबूल करता…

अल्लाह बंदे की तौबा उस समय तक ग्रहण करता है, जब तक प्राण कंठ तक न पहुँच जाए। जब प्राण कंठ तक पहुँच जाता है, तो तौबा ग्रहण नहीं होती। अल्लाह तआला का फ़रमान है : "और उनकी तौबा (क्षमा याचना) स्वीकार्य नहीं, जो बुराईयाँ करते रहते हैं, यहाँ तक कि जब उनमें से किसी की मौत का समय आ जाता है, तो कहता हैः अब मैंने तौबा कर ली।" [सूरा अन-निसा, आयत संख्या : 18]

श्रेणियाँ : दिलों को पिघलाने वाली बातें और नसीहतें · तौबा · फ़ज़ीलतें तथा आदाब

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لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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