क्या मैं तुम्हें उस चीज़ के बारे में न बताऊँ, जो श्रेणी में रोज़ा, नमाज़ और सदक़ा से भी उत…
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हदीस वर्णनकर्ता: इस ह़दीस़ को अबू दावूद और तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: क्या मैं तुम्हें उस चीज़ के बारे में न बताऊँ, जो श्रेणी…
हदीस की व्याख्या: क्या मैं तुम्हें उस चीज़ के बारे में न बताऊँ, जो श्रेणी…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सहाबा से पूछा : क्या मैं तुम्हें अधिक नफ़ल रोज़े, नमाज़ और सदक़ा के सवाब से भी उत्तम बात न बताऊँ? उन्होंने उत्तर दिया : जी हाँ। आपने कहा : झगड़ने वालों के बीच सुलह कराना, क्योंकि दुश्मनी लोगों के बीच फूट, अलगाव, आपसी द्वेष और एक-दूसरे से मुँह मोड़ने को जन्म देती है। वास्तव में, आपसी मामलों में बिगाड़ से पैदा होने वाली नफ़रत ही वह वस्तु है जो धर्म और दुनिया को नष्ट कर देती है और उसे जड़ से उखाड़ फेंकती है, जैसे उस्तरा बालों को जड़ से मूंड देता है।
सीख: क्या मैं तुम्हें उस चीज़ के बारे में न बताऊँ, जो श्रेणी…
- नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का सहाबा से सवाल करने और उन्हें जवाब जानने के लिए प्रेरित करने का तरीक़ा।
- तीबी कहते हैं : इसमें आपसी मामलों के सुधार और उनके बिगाड़ से बचने की प्रेरणा है; क्योंकि सुधार, अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थामने और मुसलमानों के बीच फूट न पड़ने का कारण बनता है, जबकि आपसी मामलों का बिगाड़ धर्म में सेंध के समान है। अतः, जो व्यक्ति उनके सुधार का कार्य करता है और उनके बिगाड़ को दूर करता है, उसका दर्जा उस रोज़े रखने वाले और नमाज़ पढ़ने वाले से भी बढ़ जाता है, जो केवल अपनी व्यक्तिगत इबादत में व्यस्त रहता है।
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मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
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