निकाह पर हदीसें

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«निकाह» पर 64 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

निकाह पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ स्त्रियों के साथ अच्छा व्यवहार करो, क्योंकि स्त्री पसली से पैदा की गई है और पसली का सबसे टेढ़ा भाग उसका ऊपरी भाग है। यदि तुम उसे सीधा करने जाओगे, तो उ सह़ीह़ तुममें से कोई उठता है और अपनी पत्नी को दास की तरह मारता है। जबकि हो सकता है कि वह उसी दिन के अंतिम भाग में उससे संभोग भी करे। स़ह़ीह़ कोई मोमिन पुरुष किसी मोमिन स्त्री से नफ़रत न करे। यदि वह उसके किसी काम को नापसंद करता है, तो उसके किसी दूसरे (अथवा अन्य) काम को पसंद करेगा। सह़ीह़ क़यामत के दिन अल्लाह के निकट सबसे बुरे लोगों में वह पुरुष भी शामिल होगा, जो अपनी पत्नी के पास जाए और उसकी पत्नी उसके पास आए, फिर वह अंदर की बातों को ब सह़ीह़ यह व्यक्ति हमारे पीछे-पीछे आ गया है। तुम उसे अनुमति दो तो ठीक है, वरना वापस हो जाएगा। उसने कहाः अल्लाह के रसूल! बल्कि मैं उसे अनुमति देता हूँ। सह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि तीन उँगलियों से खाना खा रहे थे। जब खाना खा चुके तो उँगलियों को चाट लिया। सह़ीह़ जब पति अपनी पत्नी को सहवास के लिए बुलाए, तो वह अवश्य आए, यद्यपि वह चूल्हे के पास ही क्यों न हो। ह़सन सबसे सम्पूर्ण ईमान वाला व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे आचरण वाला हो और तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो अपनी पत्नियों के हक़ में सबसे अच्छा हो स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें ख़ुतबा-ए-हाजत इस तरह सिखाया ह़सन जब तुममें से कोई किसी महिला को निकाह के लिए पैग़ाम दे तो यदि उसके बस में हो कि (उस में) उस चीज़ को देख सके जो उसको उस से विवाह के ओर आकर्षण करे, तो उसे सह़ीह़ जाओ तथा उसको देख लो, यह तुम दोनों के बीच प्रेम को बढ़ाने के लिए बहुत ही उपयुक्त है। सह़ीह़ जब अल्लाह तआला किसी पुरुष के हृदय में किसी महिला से विवाह करने का संदेशा भेजने की बात डाल दे तो कोई हर्ज नहीं है कि वह उस महिला को देख ले। ह़सन निकाह का ऐलान करो। स़ह़ीह़ वली (अभिभावक) के बिना निकाह (शादी) नहीं है। स़ह़ीह़ जो औरत अपने वली गण (अभिभावकों) की अनुमति के बिना निकाह करे, उसका निकाह बातिल है। (निकाह बातिल होने की बात आपने तीन बार कही।) अगर मर्द ने ऐसी औरत के सा सह़ीह़ वह महिला जिसका विवाह हो चुका हो, तो वह (दूसरे विवाह के समय) अपने बारे में फैसला करने में अपने वली से अधिक अधिकार रखती है और कुँवारी से आज्ञा मांगी जाए सह़ीह़ कोई महिला किसी महिला का विवाह सम्पन्न न कराए, न कोई महिला स्वयं अपना विवाह कर ले, ऐसी महिला जो स्वयं अपना विवाह कर लेती है वह ज़ानिया (दुराचारी) है। सह़ीह़ एक कुँवारी युवती नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आई तथा उसने आप से कहा कि उसके पिता ने उसका विवाह करा दिया है जिसे वह नापसंद करती है, तो नबी -सल ह़सन जो दास अपने मालिक की अनुमति के बिना निकाह कर ले, वह व्यभिचारी है। इसकी सनद सह़ीह़ है। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मैमूना (रज़ियल्लाहु अंहा) से निकाह किया, तो आप एहराम की अवस्था में थे, जब उनसे आपका मिलन हुआ, तो आप एहराम खोल कर हला सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने औतास युद्ध के साल तीन दिनों के लिए मुतआ़ की अनुमति दी और फिर उससे मना कर दिया।) सह़ीह़ अल्लाह तआला ने ह़लाला करने वाले और ह़लाला करवाने वाले पर लानत भेजी है। ह़सन ऐ बनू बयाज़ा, अबू हिंद से अपनी बेटियों का निकाह करो और उसके यहाँ अपने पुरूषों के लिए निकाह का संदेश भेजो। ह़सन दोनों में से जिसे चाहो, तलाक़ दे दो। सह़ीह़ ग़ैलान बिन सलमा सक़फ़ी मुसलमान हो गए और उनके पास जाहिलियत काल में दस स्त्रियाँ थीं, जो उनके साथ मुसलमान हो गईं, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उ सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी बेटी ज़ैनब (रज़ियल्लाहु अंहा) को अबुल आस बिन रबी (रज़ियल्लाहु अंहु) के घर छह साल बाद पहले निकाह के आधार पर ही भ ह़सन वह व्यक्ति धिक्कार का हक़दार है, जिसने अपनी औरत से उसके मलद्वार में संभोग किया। ह़सन मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम में से किसे एक के ऊपर उसकी पत्नी के किया अधिकार हैं? आपने उत्तर दिया : "जब तुम खाओ तो उसे खिलाओ, जब तुम पहनो या फ़रम सह़ीह़ यहूदी कहा करते थे किः जब कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से पीछे की ओर से (किंतु योनि में ही) संभोग करेगा, तो बच्चा भेंगा पैदा होगा। इसपर यह आयत उतरीः {نساؤكم सह़ीह़ मैंने बच्चे को दूध पिलाने के दिनों में, पत्नी से संभोग करने से, मना करने का इरादा कर लिया था, लेकिन रूम तथा फ़ारस वालों को देखा कि वे ऐसा करते हैं और सह़ीह़ यहूदी कहते हैं कि अज़्ल जीवित दफ़न करने की एक छोटी शक्ल है। आपने कहाः "यहूदी झूठ बोलते हैं। यदि अल्लाह पैदा करना चाहे, तो तुम उसे रोक नहीं सकते।" सह़ीह़ आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) से पूछा गया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नियों) का महर कितना होता था? उन्होंने कहाः आपकी पत्नियों के लिए सह़ीह़ अली (रज़ियललाहु अंहु) ने कहाः मैंने फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अंहा) से शादी की और कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मुझे उनके साथ शादीशुदा जीवन आरंभ करने दें। तो आपने सह़ीह़ अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास एक व्यक्ति का मामला आया, जिसने एक औरत से शादी की, किन्तु उसका महर निर्धारित नहीं किया और उससे संभोग करने सह़ीह़ सबसे अच्छा निकाह वह है, जो सबसे आसान हो। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी एक पत्नी का वलीमा दो मुद्द जौ से किया था। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मदीने और ख़ैबर के बीच तीन दिन रुके और वहीं सफ़िया (रज़ियल्लाहु अंहा) से (शादी के बाद) वैवाहिक संबंध स्थापित किया। स़ह़ीह़ जिसकी दो पत्नियाँ हों और उसका झुकाव किसी एक की ओर हो, वह क़यामत के दिन इस अवस्था में आएगा कि उसका एक पहलू झुका हुआ होगा। सह़ीह़ सुन्नत यह है कि जब आदमी पत्नी रहते हुए किसी कुँवारी से विवाह करे, तो उसके पास सात दिन रहे और उसके बाद बारी लगाए तथा जब किसी ग़ैरकुँवारी से विवाह करे, सह़ीह़ तुम्हारे पति के निकट तुम्हारे मान-सम्मान में कोई कमी नहीं है। यदि तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा। और अगर तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा, तो सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बारी का दिन बाँटते समय आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) को दो दिन दिया करते थे। उनका दिन और सौदा (रज़ियल्लाहु अंहा) क ह़सन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे यहाँ ठहरने के दिन बाँटते समय हमें एक-दूसरे पर तरजीह नहीं देते थे। अकसर ऐसा होता कि आप हम सभों के पास आ सह़ीह़ जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी यात्रा में निकलने का इरादा करते, तो अपनी पत्नियों के बीच क़ुरआ अंदाज़ी करते और जिसका नाम निकलता उसे ह़सन तीन काम ऐसे हैं कि उन्हें संजीदगी से किया जाए या मज़ाक़ से, उनका एतबार होगा; निकाह, तलाक़ और तलाक़शुदा स्त्री को इद्दत के अंदर लौटाना। स़ह़ीह़ तुम सब रक्षक हो और तुम सब से तुम्हारे मातहतों के बारे में पूछा जाएगा। सह़ीह़ मुहम्मद की पत्नियों के पास बहुत-सी महिलाएँ आकर अपने पतियों की शिकायत कर गई हैं। दरअसल वे तुम्हारे अच्छे लोग नहीं हैं। सह़ीह़ जो स्त्री अपने पति को दुनिया में कष्ट देती है, तो जन्नत में उसकी पत्नी उससे कहती है कि अल्लाह तेरा नाश करे, उसे कष्ट मत दे, क्योंकि वह तेरे पास एक मेह सह़ीह़ यदि मैं किसी को इस बात का आदेश दे सकता कि किसी को सजदा करे, तो स्त्री को आदेश देता कि अपने पति को सजदा करे। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने शिग़ार विवाह से मना किया है। (शिग़ार विवाह यह है कि आदमी अपनी बेटी का विवाह इस शर्त पर कराए कि दूसरा भी अ स़ह़ीह़ तुममें से जो शादी की शक्ति रखता है, वह शादी कर ले। क्योंकि शादी निगाहों को नीचा रखने तथा शर्मगाह की सुरक्षा का एक प्रमुख कारण है। और जो शादी न कर सके, सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ख़ैबर के दिन निकाहे-मुताह (अस्थायी निकाह) तथा घरेलू गधे का मांस खाने से मना किया था। स़ह़ीह़ वह शर्त, जो इस बात की सबसे ज़्यादा हक़दार है कि उसे पूरा किया जाए, वह शर्त है, जिसके द्वारा (शादी के समय) तुम (स्त्रियों के) गुप्तांग (अर्थात: योनि) सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने सफ़िय्या (रज़ियल्लाहु अंहा) को गुलामी से मुक्त किया और उनकी मुक्ति को उनका महर बनाया। सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल! मैं ने शादी कर ली है। फ़रमायाः उसका महर क्या है?, कहाः गिठली समान सोना। फ़रमायाः अल्लाह बरकत दे, वलीमा करो, चाहे एक बकरी ही क्यों न सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अज़्ल (संभोग के समय वीर्य-स्खलन से पहले लिंग को बाहर निकाल लेना ताकि अंदर स्खलन न हो) के बारे में बताया ग सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसमान बिन मज़ऊन के विवाहित जीवन से अलग होकर इबादत में लगे रहने के इरादे को नकार दिया था। यदि उन्हें अनुमत सह़ीह़ तुम्हें क़ुरआन का जो कुछ याद है, उसके बदले में मैंने उससे तुम्हारा विवाह कर दिया। सह़ीह़ यदि वह मेरी गोद में परवरिश न भी पाई होती, तो भी मेरे लिए हलाल न होती। इसलिए कि वह मेरे दूध-शरीक भाई की बेटी है। मुझे और अबू सलमा को सुवैबा ने स्तनपान सह़ीह़ हम अज़्ल (संभोग के दौरान वीर्यस्खलन से पहले लिंग को बाहर निकाल लेना, ताकि अंदर वीर्यस्खलन न हो) करते थे, जबकि क़ुरआन उतर रहा था। सुफ़यान कहते हैं कि य सह़ीह़ विधवा स्त्री की शादी नहीं हो सकती, जब तक उससे मशविरा न कर लिया जाए तथा कुँवारी स्त्री की शादी नहीं हो सकती, जब तक उसकी अनुमति न ले ली जाए। सहाबा ने कह
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.7 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद