मैं जुंबी -अपवित्र- था। अतः मुझे अच्छा नहीं लगा कि अपवित्रता की अवस्था में आपके पास बैठूँ!…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: मैं जुंबी -अपवित्र- था। अतः मुझे अच्छा नहीं लगा कि अपवि…

हदीस की व्याख्या: मैं जुंबी -अपवित्र- था। अतः मुझे अच्छा नहीं लगा कि अपवि…

मदीने के किसी रास्ते में अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) की भेंट अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से हो गई। इत्तेफ़ाक से उस समय वह जनाबत की अवस्था में थे। चूँकि उनके दिल में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का बड़ा सम्मान था, इसलिए इस अवस्था में आपके पास बैठने एवं आपसे बात करने को, उनका दिल गवारा न किया। अतः, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को बताए बिना चुपके से निकल लिए और स्नान कर आए।

जब आए, तो आपने पूछा कि कहाँ गए थे? उन्होंने सब कुछ बताया और कहा कि नापाकी की अवस्था में आपके पास बैठना गवारा न हुआ।

चूँकि अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) जुंबी को नापाक समझते थे, इसलिए आपने उन पर आश्चर्य प्रकट किया और उन्हें बताया कि मोमिन किसी भी हाल में अपवित्र नहीं होता।

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إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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