इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > अल्लाह उनकी क़ब्रों तथा घरों को आग से भर दे, उन्होंने हमें अस्र की नमाज़ से व्यस्त रखा , य…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن عَلِي بن أبي طالب رضي الله عنه أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ يَوْمَ الْخَنْدَقِ: «مَلَأ اللهُ قُبُورَهم وبُيُوتَهُم نَارًا، كَمَا شَغَلُونَا عن الصَّلاَة الوُسْطَى حَتَّى غَابَت الشَّمس».
وفي لفظ لمسلم: «شَغَلُونَا عن الصَّلاَة الوُسْطَى -صلاة العصر-»، ثم صَلاَّهَا بين المغرب والعشاء».
وله عن عبد الله بن مسعود قال: «حَبَسَ المُشرِكُون رسول الله صلى الله عليه وسلم عن العصر، حَتَّى احْمَرَّت الشَّمسُ أو اصْفَرَّت، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم : شَغَلُونَا عن الصَّلاَة الوُسْطَى -صلاة العصر-، مَلَأَ الله أَجْوَافَهُم وقُبُورَهم نَارًا (أَو حَشَا الله أَجْوَافَهُم وَقُبُورَهُم نَارًا)».
मुश्रिकों ने ख़ंदक़ युद्ध के अवसर पर एक दिन नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और आपके सहाबा को पहरेदारी और मदीने की निगरानी में इतना व्यस्त रखा कि वे अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ सके और सूरज डूब गया। अतः, आप और आपके साथी सूरज डूबने के बाद ही अस्र की नमाज़ पढ़ पाए। यही कारण है कि आपने उनके हक़ में बददुआ की कि अल्लाह उनके पेटों, घरों तथा क़ब्रों को आग से भर दे। क्योंकि उन्होंने अस्र की नमाज़ से रोकने के साथ-साथ, जो सबसे उत्तम नमाज़ है, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके साथियों को कष्ट भी दिया था।
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