इस्लाम > Hi > हदीस > इबदत पर आधरत फकह > जब किसी मुसलमान के सामने फ़र्ज़ नमाज़ का समय आता है और वह अच्छी तरह वज़ू करके, पूरी विनयशी…
स़ह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयइस हदीस में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जब किसी मुसलमान के सामने फ़र्ज़ नमाज़ का समय उपस्थित होता है और वह उसके लिए अच्छी तरह और पूरे तौर पर वज़ू करता है, इस तरह विनयशीलता के साथ नमाज़ पढ़ता है कि उसका दिल और उसके शरीर के अंग अल्लाह की ओर मुतवज्जेह हों और उसकी महानता को ध्यान में रखे हुए हों तथा नमाज़ के सारे कार्य जैसे रुकू एवं सजदे आदि पूरे तौर पर करता है, तो यह नमाज़ उसके पिछले छोटे-छोटे गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाती है, जब तक वह किसी बड़े गुनाह में संलिप्त न हो। अल्लाह का यह अनुग्रह किसी काल खंड के साथ सीमित न होकर हर दौर और हर नमाज़ में व्याप्त है।
श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · नमाज़ · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · नमाज़ की फ़ज़ीलत