परिधान के आदाब पर हदीसें

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«परिधान के आदाब» पर 15 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

परिधान के आदाब पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ अल्लाह के रसूल- सल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सोने की एक अँगूठी बनवाई। स़ह़ीह़ न रेशम पहनो और न दीबाज (मोटे रेशमी वस्त्र)। न सोने-चाँदी के बरतन में पियो और न उनकी थाली में खाओ। क्योंकि यह वस्तुएँ दुनिया में उन (काफ़िरों) के लिए ह स़ह़ीह़ जिसने दुनिया में रेशमी वस्त्र पहना, वह उसे आख़िरत में नहीं पहनेगा। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दो अथवा तीन अथवा चार अंगुल समान रेशम पहनने की अनुमति दी है सह़ीह़ जब तुम वस्त्र धारण करो अथवा वज़ू करो तो दाहिने ओर से प्रारंभ करो स़ह़ीह़ मुसलमान का तहबंद आधी पिंडली तक होना चाहिए और यदि आधी पिंडली एवं टखने के बीच हो, तो भी कोई हर्ज (अथवा गुनाह) नहीं है। हाँ, जो दोनों टखनों से नीचे होगा, सह़ीह़ जब तुममें से कोई जूता पहने, तो दाएँ पाँव से शुरू करे और जब जूता उतारे, तो बाएँ पाँव से शुरू करे। दाएँ पाँव में पहले जूता पहना जाए और बाद में उतारा जाए सह़ीह़ तुममें से कोई एक जूता पहनकर न चले। या तो दोनों पहनकर चले या दोनों उतार दे। स़ह़ीह़ अल्लाह उस व्यक्ति की ओर नहीं देखेगा, जो अभिमान के कारण अपना कपड़ा लटकाकर चलता हो। ह़सन जिसने अल्लाह के लिए विनम्रता दिखाते हुए ऐसा वस्त्र पहनने से गुरेज़ किया, जिसे पहनने की वह शक्ति रखता है, अल्लाह क़यामत के दिन उसे सारी सृष्टियों के सा सह़ीह़ मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास से गुजरा। उस समय मेरी लुँगी ढ़ीली होकर नीचे लटक चुकी थी। अतः, आपने फ़रमायाः ऐ अब्दुल्लाह, अपनी लु सह़ीह़ अभिमान तथा अहंकार का हराम होना और इसका बुरा अंत स़ह़ीह़ अपने कपड़ों में से सफ़ेद कपड़े पहना करो। ये तुम्हारे सबसे अच्छे कपड़ों में से हैं। तथा इन्हीं में अपने मुर्दों को दफ़न किया करो। स़ह़ीह़ एक मर्द दूसरे मर्द के गुप्तांग और एक महिला दूसरी महिला के गुप्तांग को न देखे सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आदमी को खड़े होकर जूता पहनने से मना फ़रमाया है
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.1 / 29.5
रोशनी 94%
12 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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