परिवार से संबंधित फ़िक़्ह पर हदीसें

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«परिवार से संबंधित फ़िक़्ह» पर 177 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

परिवार से संबंधित फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ यहूदी कहते हैं कि अज़्ल जीवित दफ़न करने की एक छोटी शक्ल है। आपने कहाः "यहूदी झूठ बोलते हैं। यदि अल्लाह पैदा करना चाहे, तो तुम उसे रोक नहीं सकते।" सह़ीह़ आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) से पूछा गया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नियों) का महर कितना होता था? उन्होंने कहाः आपकी पत्नियों के लिए सह़ीह़ अली (रज़ियललाहु अंहु) ने कहाः मैंने फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अंहा) से शादी की और कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मुझे उनके साथ शादीशुदा जीवन आरंभ करने दें। तो आपने सह़ीह़ अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास एक व्यक्ति का मामला आया, जिसने एक औरत से शादी की, किन्तु उसका महर निर्धारित नहीं किया और उससे संभोग करने सह़ीह़ सबसे अच्छा निकाह वह है, जो सबसे आसान हो। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी एक पत्नी का वलीमा दो मुद्द जौ से किया था। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मदीने और ख़ैबर के बीच तीन दिन रुके और वहीं सफ़िया (रज़ियल्लाहु अंहा) से (शादी के बाद) वैवाहिक संबंध स्थापित किया। स़ह़ीह़ जिसकी दो पत्नियाँ हों और उसका झुकाव किसी एक की ओर हो, वह क़यामत के दिन इस अवस्था में आएगा कि उसका एक पहलू झुका हुआ होगा। सह़ीह़ सुन्नत यह है कि जब आदमी पत्नी रहते हुए किसी कुँवारी से विवाह करे, तो उसके पास सात दिन रहे और उसके बाद बारी लगाए तथा जब किसी ग़ैरकुँवारी से विवाह करे, सह़ीह़ तुम्हारे पति के निकट तुम्हारे मान-सम्मान में कोई कमी नहीं है। यदि तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा। और अगर तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा, तो सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बारी का दिन बाँटते समय आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) को दो दिन दिया करते थे। उनका दिन और सौदा (रज़ियल्लाहु अंहा) क ह़सन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे यहाँ ठहरने के दिन बाँटते समय हमें एक-दूसरे पर तरजीह नहीं देते थे। अकसर ऐसा होता कि आप हम सभों के पास आ स़ह़ीह़ एक दीनार जो तुमने अल्लाह के रास्ते में खर्च किया, एक दीनार जो तुमने किसी दास को मुक्त करने के लिए खर्च किया, एक दीनार जो तुमने किसी निर्धन को दान किया सह़ीह़ जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी यात्रा में निकलने का इरादा करते, तो अपनी पत्नियों के बीच क़ुरआ अंदाज़ी करते और जिसका नाम निकलता उसे सह़ीह़ बाग ग्रहण कर लो और उसे एक तलाक़ दे दो। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के युग में साबित बिन क़ैस (रज़ियल्लाहु अंहु) की पत्नी ने उनसे ख़ुला ले लिया, तो आपने ने उन्हें एक माहवारी तक इद्दत में सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) के ज़माने में तथा उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) के ख़लीफ़ा रहने के (आरंभ के) दो सालो ह़सन (रुकाना और उनके भाइयों के पिता) अब्द-ए-यज़ीद ने रुकाना की माता को तलाक़ देकर मुज़ैना क़बीले की एक स्त्री से निकाह कर लिया। फिर, वह स्त्री नबी (सल्लल्ल ह़सन तीन काम ऐसे हैं कि उन्हें संजीदगी से किया जाए या मज़ाक़ से, उनका एतबार होगा; निकाह, तलाक़ और तलाक़शुदा स्त्री को इद्दत के अंदर लौटाना। स़ह़ीह़ अल्लाह ने मेरी उम्मत की वह बातें माफ़ कर रखी हैं, जो उसके दिलों में आएँ, जब तक अमल न करे अथवा ज़ुबान से न बोले। सह़ीह़ जब कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को अपने ऊपर हराम कर ले, तो उसे कुछ नहीं माना जाएगा। वह यह आयत भी पढ़ते थेः {لقد كان لكم في رسول الله أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ} (अर् सह़ीह़ आदम की संतान को ऐसी वस्तु की मन्नत मानने का अधिकार नहीं, जिसका वह मालिक न हो, ऐसे दास को मुक्त करने का अधिकार नहीं जिसका वह स्वामी न हो और ऐसी स्त्री सह़ीह़ तुमने ग़ैर-सुन्नत तरीक़े से तलाक़ दी और ग़ैर-सुन्नत तरीक़े से लौटाया। उसे तलाक़ देते समय गवाह बनाओ और लौटाते समय गवाह बनाओ तथा ऐसा काम दोबारा न करो। सह़ीह़ (ईला -किसी कारण अपनी पत्नी के पास न जाने की क़सम खा लेना- के पश्चात) जब चार महीने बीत जाएँ, तो पति को रोका जाएगा, यहाँ तक कि तलाक़ दे दे और तलाक़ उस स सह़ीह़ मुझे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के दस से अधिक साथी मिले, सब के सब 'ईला' करने वाले (चार महीने या उससे अधिक अवधि तक अपनी पत्नी के पास न ज मुझे अल्लामा अलबानी का कोई हुक्म नहीं मिला। जाहिलियत काल के लोग साल दो साल तक के लिए 'ईला' (अपनी पत्नी के पास न जाने की क़सम खाना) किया करते थे। फिर अल्लाह ने 'ईला' के समय का निर्धारण कर दिया। अ ह़सन एक व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया। उसने अपनी पत्नी से 'ज़िहार' करने के बाद उससे संभोग कर लिया था। ह़सन 'ज़िहार' के बारे में सलमा बिन सख़्र की हदीस सह़ीह़ उसकी पत्नी पर नज़र रखो, अगर वह गोरा-चिट्टा, सीधे बालों और लाल आँखों वाला बच्चा जनती है, तो वह हिलाल बिन उमय्या का है और अगर सुरमई आँखों, घुंघराले बालो सह़ीह़ उवैमिर अजलानी, आसिम बिन अदी अंसारी के पास आए और उनसे कहाः ऐ आसिम, आप उस व्यक्ति के बारे में क्या कहते हैं, जो अपनी पत्नी के साथ किसी को पाए? क्या वह उ सह़ीह़ एक व्यक्ति ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहाः मेरी पत्नी यदि कोई उसे छूना चाहे, तो आपत्ति नहीं करती (अर्थात: वह पुरुषों के साथ बात-चीत इसकी सनद ह़सन है। जब किसी ने क्षण भर के लिए भी अपने बच्चे का इक़रार कर लिया, तो वह उसका इनकार नहीं कर सकता। सह़ीह़ बरीरा (रज़ियल्लाहु अंहा) को आदेश दिया गया था कि तीन माहवारी तक इद्दत गुज़ारें। सह़ीह़ तुम अपने बाग के खजूर अवश्य तोड़ो। हो सकता है कि तुम सदक़ा करो या कोई और भलाई का कार्य करो। सह़ीह़ "तुम इद्दत पूरी होने तक अपने उसी घर में रहो।" उनका कहना है कि फिर मैंने वहीं इद्दत के चार महीने दस दिन गुज़ारे। सह़ीह़ फ़ातिमा बिंत क़ैस (रज़ियल्लाहु अंहा) का यह कहना कि ऐ अल्लाह के रसूल, मेरे पति ने मुझे तीन तलाक़ दे दिए हैं और मुझे भय है कि कोई मेरे यहाँ ज़बरदस्ती घु सह़ीह़ तुम लोग हमें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत के बारे में संदेह में न डालो। उम्मे वलद (वह दासी जो अपने मालिक की संतान की माँ बन जाए सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) ने हफ़सा बिंत अब्दुर्रहमान बिन अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अंहा) को, जब उनकी तीसरी सह़ीह़ दास आज़ाद स्त्री को दो तलाक़ देगा और वह तीन माहवारी इद्दत गु़ज़ारेगी, जबकि आज़ाद व्यक्ति दासी को दो तलाक़ देगा और वह आम दासियों की तरह दो माहवारी इद्द मुझे अल्लामा अलबानी का कोई हुक्म नहीं मिला। जिस स्त्री का पति गुम हो जाए और पता न चल सके कि वह कहाँ है? वह चार साल प्रतीक्षा करे और फिर चार महीना दस दिन इद्दत गुज़ारे। अब उसके लिए कहीं और निकाह सह़ीह़ कोई व्यक्ति किसी शादीशुदा स्त्री के पास हरगिज़ रात न बिताए। हाँ, यह और बात है कि वह उसकी पत्नी हो या उसकी कोई ऐसी रिश्तेदार हो, जिससे हमेशा के लिए निक सह़ीह़ किसी गर्भवती से संभोग न किया जाए जब तक प्रसव न हो जाए और न किसी बिना गर्भ वाली से संभोग किया जाए जब तक उसे एक माहवारी न आ जाए। सह़ीह़ एक दो बार दूध पीने से हुरमत सिद्ध नहीं होती। सह़ीह़ उसे दूध पिला दो, तुम उसपर हराम हो जाओगी और अबू हुज़ैफ़ा के दिल में जो बात है, वह ख़त्म हो जाएगी। सह़ीह़ क़ुरआन की जो आयतें उतारी गई थीं, उनमें से एक आयत थीः "दस बार दूध पीने से, जो मालूम हों, हुरमत साबित होती है।" फिर यह आयत मनसूख़ (निरस्त) हो गई और पाँच सह़ीह़ दूध पीने से हुरमत उसी समय सिद्ध होती है, जब दूध अंतड़ियों तक पहुँचे और उन्हें सैराब करने का कार्य करे और दूध पिलाने का कार्य दूध छुड़ाने से पहले हुआ ह सह़ीह़ देने वाले का हाथ ऊपर होता है। आरंभ उससे करो जिसके ऊपर खर्च करना तुम्हारे ऊपर वाजिब है : तुम्हारी माता, तुम्हारे पिता, तुम्हारी बहन, तुम्हारे भाई, फिर सह़ीह़ किसी व्यक्ति के पापी (गुनहगार) होने के लिए बस इतना काफी है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति का राशन रोक ले, जिसका राशन उसके हाथ में है। सह़ीह़ उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने सेनाओं के सेनापतियों के नाम उन लोगों के विषय में पत्र लिखकर आदेश जारी किया, जो अपनी पत्नियों से दूर रहते थे कि ह़सन तुम्हें इसे अपने पास रखने का हक़ अधिक है, जब तक दूसरी शादी न कर लो। स़ह़ीह़ तुम सब रक्षक हो और तुम सब से तुम्हारे मातहतों के बारे में पूछा जाएगा। सह़ीह़ यह तुम्हारा पिता है तथा यह तुम्हारी माता। इनमें से जिसका चाहो हाथ पकड़ लो। सह़ीह़ माता-पिता के बीच इस्लाम के कारण अलगाव के समय बच्चे को माँ और बाप में से किसी एक को चुनने का विकल्प देने के संबंध में राफे बिन सिनान -रज़ियल्लाहु अन्हु सह़ीह़ मुहम्मद की पत्नियों के पास बहुत-सी महिलाएँ आकर अपने पतियों की शिकायत कर गई हैं। दरअसल वे तुम्हारे अच्छे लोग नहीं हैं। सह़ीह़ मैं अपने पिता के साथ नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास गया। फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मेरे पिता से फ़रमाया : “क्या यह तुम्ह सह़ीह़ जो स्त्री अपने पति को दुनिया में कष्ट देती है, तो जन्नत में उसकी पत्नी उससे कहती है कि अल्लाह तेरा नाश करे, उसे कष्ट मत दे, क्योंकि वह तेरे पास एक मेह सह़ीह़ नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ज़नाने मर्द और मर्दानी औरतों पर लानत फरमाई है तथा आपने फ़रमाया : “उन्हें अपने घरों से निकाल दो।” सह़ीह़ हिलाल बिन उमैया -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सामने अपनी पत्नी पर शरीक बिन सहमा के साथ कुकर्म करने का आरोप लगाया, तो अल्लाह सह़ीह़ यदि मैं किसी को इस बात का आदेश दे सकता कि किसी को सजदा करे, तो स्त्री को आदेश देता कि अपने पति को सजदा करे। सह़ीह़ अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने अपनी पत्नी को मासिक धर्म की हालत में तलाक़ दे दी, तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.6 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
سبحان الله अल्लाह की पवित्रता है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद