जो क़ुरआन को मधुर आवाज़ से न पढ़े, वह हम में से नहीं है

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: जो क़ुरआन को मधुर आवाज़ से न पढ़े, वह हम में से नहीं है

عن أبي لبابة بشير بن عبد المنذر رضي الله عنه : أن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «مَن لَم يَتَغنَّ بِالقُرآنِ فَليسَ مِنَّا».

हदीस की व्याख्या: जो क़ुरआन को मधुर आवाज़ से न पढ़े, वह हम में से नहीं है

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इस हदीस में मधुर आवाज़ में क़ुरआन पढ़ने की प्रेरणा दी है। दरअसल हदीस में आए हुए शब्द "مَن لَم يَتَغنَّ بِالقُرآنِ" के दो अर्थ हैं : एक, जो मधुर आवाज़ में क़ुरआन न पढ़े और दुसरा, जो क़ुरआन से संतुष्ट होकर अन्य स्थानों में मार्गदर्शन ढूँढना न छोड़े, वह हम में से नहीं है। दरअसल यह बड़ी सख़्त चेतावनी है, जो इस बात को प्रमाणित करती है कि यह एक बड़ा गुनाह है, जो चेतावनी एवं धमकी का हक़दार है। इस बात में कोई संदेह है भी नहीं कि जो क़ुरआन को छोड़ कहीं और मार्गदर्शन ढूँढे, उसे अल्लाह गुमराह कर देगा। हम इस तरह के पापों से अल्लाह की शरण माँगते हैं। इस हदीस से मालूम हुआ कि इन्सान को मधुर आवाज़ में क़ुरआन पढ़ना चाहिए और उसी से संतुष्ट रहना चाहिए।

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الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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