पेशाब (के छींटों) से बचो, क्योंकि आम तौर से क़ब्र का अज़ाब उसी के कारण होता है
इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > पेशाब (के छींटों) से बचो, क्योंकि आम तौर से क़ब्र का अज़ाब उसी के कारण होता है
हदीस वर्णनकर्ता: इसे दारक़ुतनी ने रिवायत किया है ।
सह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समय
हदीस का पाठ: पेशाब (के छींटों) से बचो, क्योंकि आम तौर से क़ब्र का अज…
عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعًا: «اسْتَنْزِهوا من البول؛ فإنَّ عامَّة عذاب القبر منه».
हदीस की व्याख्या: पेशाब (के छींटों) से बचो, क्योंकि आम तौर से क़ब्र का अज…
इस हदीस में अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हमें क़ब्र की यातना के असबाब में से एक सबब बताया है, जो उसका सबसे आम सबब भी है। यह सबब है, पेशाब से न बचना और उससे पवित्रता प्राप्त न करना।
सीख: पेशाब (के छींटों) से बचो, क्योंकि आम तौर से क़ब्र का अज…
- पेशाब से इस तरह बचना और दूर रहना कि वह शरीर और कपड़े में न लगे।
- बेहतर यह है कि उसे फौरन धो दिया जाए और लगने के बाद ही साफ़ कर दिया जाए, ताकि आदमी गंदगी के साथ न रहे। लेकिन उसे हटाना वाजिब नमाज़ के समय होता है।
- पेशाब नापाक चीज़ है और शरीर, कपड़ा अथवा स्थान में पड़ने पर उसे नापाक कर देता है एवं उसके साथ नमाज़ सही नहीं होती। क्योंकि नापाक चीज़ों से पवित्र होना नमाज़ की शर्तों में से एक शर्त है।
- पेशाब से पवित्र न रहना बड़ा गुनाह है।
- क़ब्र की यातना का सबूत, जो कि क़ुरआन, सुन्नत एवं उम्मत के मतैक्य से साबित है।
- आख़िरत के प्रतिफल का सबूत, क्योंकि आख़िरत के मर्हलों में से पहला मर्हला क़ब्र है। क़ब्र या तो जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ है या जहन्नम के गड्ढों में से एक गड्ढा।
श्रेणियाँ :
इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह
· तहारत (पवित्रता प्राप्त करना)
· फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
· पेशाब-पाखाना के आदाब
بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
أستغفر الله
मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ