मैंने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ नमाज़ पढ़ी। आप अपनी दाईं ओर "अस्सलाम…
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे अबू दावूद ने रिवायत किया है
ह़सन
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: मैंने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ न…
हदीस की व्याख्या: मैंने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ न…
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब अपनी नमाज़ से निकलना चाहते थे, तो दाएँ एवं बाएँ ओर सलाम फेरते थे। सलाम फेरने का तरीक़ा यह था कि पहले अपने चेहरे को दाएं ओर फेरते हुए "अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बकरकातुह" कहते और उसके बाद बाएं ओर फेरते हुए "अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह" कहते।
सीख: मैंने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ न…
- नमाज़ में दो सलाम हैं। और सलाम फेरना नमाज़ का एक स्तंभ है।
- सलाम फेरते समय कभी-कभी "व बकरकातुह" शब्द बढ़ा लेना मुसतहब है। क्योंकि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- इस शब्द का प्रयोग हमेशा नहीं करते थे।
- नमाज़ में दोनों सलामों का उच्चारण एक स्तंभ एवं अनिवार्य कार्य है। लेकिन सलाम का उच्चारण करते हुए मुँह फेरना केवल मुसतहब है।
- "अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाह" सलाम फेरते समय कहना चाहिए। न उससे पहले और न उसके बाद।
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बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
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