एक रात में दो वित्र नहीं हैं।

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: एक रात में दो वित्र नहीं हैं।

عن قيس بن طلق، قال: زارنا طلْق بن علي في يوم من رمضان، وأَمْسى عندنا، وأفطر، ثم قام بنا الليلة، وأَوْتَرَ بنا، ثم انحدر إلى مسجده، فصلى بأصحابه، حتى إذا بقي الوتر قَدَّمَ رجلا، فقال: أَوْتِرْ بأصحابك، فإني سمعت النبي صلى الله عليه وسلم يقول: «لا وِتْرَانِ في ليلة».

हदीस की व्याख्या: एक रात में दो वित्र नहीं हैं।

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اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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