इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > अल्लाह ने उसकी राह में जिहाद करने वाले की ज़िम्मेवारी ली है कि यदि वह मर गया, तो उसे जन्नत…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن أبي هريرة رضي الله عنه أن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «انْتَدَبَ الله (ولمسلم: تَضَمَّنَ الله) لِمَنْ خَرَجَ فِي سَبِيلِهِ، لا يُخْرِجُهُ إلاَّ جِهَادٌ فِي سَبِيلِي، وإيمان بي، وتصديق برسلي فهو عَلَيَّ ضامن: أَنْ أُدْخِلَهُ الجنة، أو أرجعه إلى مسكنه الذي خرج منه، نائلًا ما نال من أجر أو غنيمة».
ولمسلم: «مثل المجاهد في سبيل الله -والله أعلم بمن جاهد في سبيله- كَمَثَلِ الصَّائِمِ القائم، وَتَوَكَّلَ الله لِلْمُجَاهِدِ فِي سَبِيلِهِ إنْ تَوَفَّاهُ: أن يدخله الجنة، أو يرجعه سالما مع أجر أو غنيمة».
इस हदीस में अल्लाह की ओर से तीन चीज़ों की ज़मानत है, उस के लिए जो निष्ठापूर्ण ईमान के साथ अल्लाह के रास्ते में जिहाद के लिए निकला हो। यदि शहीद हो जाए, तो जन्नत में प्रवेश करेगा। यदि जीवित रहा, तो नेकी अथवा माले गनीमत के संग वापस होगा, अर्थात बिना गनीमत सिर्फ़ नेकी के साथ या नेकी और गनीमत दोनों के साथ।
जहाँ तक दूसरी रिवायत की बात है, जिसे उम्दा के लेखक ने मुस्लिम की तरफ़ मंसूब किया है, हालाँकि वह बुखारी में भी है, उस में है कि अल्लाह के रास्ते में जिहाद की श्रेष्ठता उस व्यक्ति की तरह है, जो मस्जिद में दाखिल होकर सदा नमाज़ पढ़ता रहता हो, अथवा रोज़ेदार जो हमेशा रोज़ा रखता हो, और ऐसा करना मनुष्य के बस से बाहर है।
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