अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- काबा के अंदर गए। उसामा बिन ज़ैद, बिलाल और उस्मान…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- काबा के अंदर…

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما قال: «دخل رسول الله صلى الله عليه وسلم البيت، وأسامة بن زيد وبلال وعثمان بن طلحة، فأغلقوا عليهم الباب فلما فتحوا كنت أولَ من وَلَجَ. فلقيتُ بلالًا، فسألته: هل صلى فيه رسول الله صلى الله عليه وسلم ؟ قال: نعم ، بين العَمُودَيْنِ اليَمَانِيَيْنِ».

हदीस की व्याख्या: अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- काबा के अंदर…

जब सन् आठ हिजरी में अल्लाह तआला ने मक्का पर विजय दिला दी और अपने घर को बुतों से पवित्र कर दिया, तो रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) काबा में दाख़िल हुए। आपके साथ आपके दोनों सेवक बिलाल और उसामा तथा काबा के मुतवल्ली उसमान बिन तलहा (रज़ियल्लाहु अंहुम) भी थे। दाख़िल होने के बाद अंदर से द्वार बंद कर लिए, ताकि लोग यह देखने के लिए भीड़ न लगा दें कि आप इबादत कैसे करते हैं, जो आपके असल उद्देश्य यानी अपने रब से मुनाजात (प्रार्थना) और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करने की राह में बाधा बन जाए। फिर बड़ी देर बाद द्वार खोले।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा), जो नबी (सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम) के एक-एक कार्य को ध्यान से देखते और उस पर अमल करने के प्रयास में रहते थे, द्वार खुलने के बाद सबसे पहले अंदर गए और बिलाल (रज़ियल्लाहु अंहु) से पूछा कि क्या रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अंदर नमाज़ पढ़ी है? तो उन्होंने जवाब दिया कि हाँ, दो यमनी खंबों के बीच में खड़े होकर नमाज़ पढ़ी है। उन दिनों पवित्र काबा छः खंबों पर खड़ा था। नमाज़ पढ़ते समय तीन खंबे आपके पीछे थे तथा दो दाएँ और एक बाएँ। आपके और दीवार के बीच तीन हाथ की दूरी थी। आपने वहाँ दो रकअत नमाज़ पढ़ी और उसके चारों भागों में दुआएँ कीं।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · नमाज़ · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · नमाज़ की शर्तें

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.6 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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