इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक व्यक्ति को कुरबानी का ऊँट हाँककर ले जाते दे…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن أبي هريرة رضي الله عنه «أن نبي الله صلى الله عليه وسلم رأى رجلا يَسُوقُ بَدَنَةً، فقال: اركبها، قال: إنها بَدَنَةٌ، قال اركبها، فرأيته رَاكِبَهَا، يُسَايِرُ النبي صلى الله عليه وسلم ».
وفي لفظ: قال في الثانية، أو الثالثة: «اركبها وَيْلَكَ أو وَيْحَكَ».
जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक व्यक्ति को देखा कि वह कुरबानी का ऊँट हाँककर ले जा रहा है, जबकि उसे उस पर सवार होने की आवश्यकता भी थी, तो उससे फ़रमायाः "इस पर सवार हो जा।" लेकिन चूँकि क़ुरबानी का जानवर लोगों की नज़रों में सम्मानित था और उसे कोई कष्ट नहीं दिया जा सकता था, इसलिए सहाबी ने कहा कि यह तो कुरबानी का ऊँट है, जो काबा की ओर ले जाया जा रहा है? तो उन्हें सख़्ती से संबोधित करते हुए और इस पर सवार होने की वैधता को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस पर सवार हो जा, यद्यपि यह कुरबानी का जानवर ही क्यों न हो। चुनांचे इतना सुनने के बाद वह ऊँट पर सवार हो गए।
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